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भारत के 'घातक' ड्रोन की पहली बार सफल उड़ान, चीन-पाकिस्तान की उड़ी नींद

एएफडब्ल्यूटीडी से भारतीय सेना मजबूत होगी और तीन-चार साल में स्वदेशी स्टेल्थ ड्रोन की मदद से सीमाओं पर निगरानी करने लगेगा.

भारत के 'घातक' ड्रोन की पहली बार सफल उड़ान, चीन-पाकिस्तान की उड़ी नींद

डीआरडीओ का घातक ड्रोन

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डीएनए हिंदी: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को पहली बार ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर (Autonomous Flying Wing Technology Demonstrator- AFWTD) को उड़ाया. कर्नाटक के चित्रदुर्ग में अपने पूर्ण स्वचालित विमान की सफलतापूर्वक उड़ान पूरी की. DRDO के अधिकारी ने कहा कि मानवरहित विमान ने सटीकता के साथ उड़ान भरी और फिर सुगम तरीके से जमीन पर उतर गया.

बयान के मुताबिक, यह उड़ान भविष्य के मानवरहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साबित करने के मामले में एक प्रमुख उपलब्धि है और यह सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. बयान में कहा गया कि इस मानवरहित वायुयान को वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (एडीई), बेंगलुरु द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है जो डीआरडीओ की एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला है.

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जानकारी के मुताबिक, यह एक छोटे टर्बोफैन इंजन द्वारा संचालित होता है. विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले एयरफ्रेम, अंडर कैरिज और संपूर्ण उड़ान नियंत्रण और वैमानिकी प्रणाली स्वदेशी रूप से विकसित हैं. 

राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई दी है. इसमें राजनाथ सिंह के हवाले से कहा गया कि यह मानवरहित विमानों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है और इससे महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों के रूप में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग भी प्रशस्त होगा.

पड़ोसी मुल्क ड्रोन के मामले में भारत से आगे
भारत ड्रोन और यूएवी के मामले में पाकिस्तान से एक दशक और चीन से काफी पीछे है. पाकिस्तान और चीन लड़ाकू ड्रोन समेत कई हथियारों को विकसित करने और पाने के लिए एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं. इसलिए भारत ने रहस्यमयी स्टेल्थ ड्रोन घातक (Stealth Drone Ghatak) बनाया है. पिछले साल ही इसकी तस्वीर सामने आई थी. इससे भारतीय सेना मजबूत होगी और तीन-चार साल में स्वदेशी स्टेल्थ ड्रोन की मदद से सीमाओं पर निगरानी करने लगेगा. आतंकियों के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हो जाएगा.

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कैसा घातक होगा UCAV? 
DRDO के वैज्ञानिकों ने इसके आकार, वजन, रेंज आदि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. लेकिन माना जा रहा है कि यह 30,000 फीट ऊंचाई तक जा सकता है. इसका वजन 15 टन से कम है. इस ड्रोन से मिसाइल, बम और प्रेसिशन गाइडे़ हथियार दागे जा सकते हैं. इसमें स्वदेशी कावेरी इंजन भी लगा है. यह 52 किलो न्यूटन की ताकत विमान को मिलती है. अभी जो प्रोटोटाइप है उसकी लंबाई चार मीटर है. विंगस्पैन 5 मीटर है. इतना ही नहीं, यह 200 किमी की रेंज तक जमीन से कमांड हासिल कर सकता है. अभी एक घंटे तक उड़ान भर सकता है.

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