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Heart Attacks: क्‍या कोविड वैक्‍सीन से हार्ट अटैक का कनेक्‍शन है? WHO की पूर्व चीफ साइंटिस्ट का चौंकाने वाला खुलासा

COVID Heart Attacks: पूर्व WHO मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि कोविड वैक्सीन लेने के बाद हार्ट अटैक का खतरा 4 से 5 फीसदी बढ़ गया है.

Heart Attacks: क्‍या कोविड वैक्‍सीन से हार्ट अटैक का कनेक्‍शन है? WHO की पूर्व चीफ साइंटिस्ट का चौंकाने वाला खुलासा

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डीएनए हिंदी: बीते कुछ समय से युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं. नौजवानों में जिम में एक्सरसाइज करते हुए हार्ट अटैक के लगातार मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में हार्ट अटैक के खतरे को कोरोना से जोड़कर देखा जा रहा है. कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इसके पीछे कोविड वैक्सीन जिम्मेदार है. इस बीच पूर्व डब्ल्यूएचओ (WHO) मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन (Soumya Swaminathan) का चौंकाने वाला बयान सामने आया है. उन्होंन कहा कि हार्ट अटैक, डायबिटीज, स्ट्रोक का खतरा बढ गया है.

सौम्या स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि कोविड वैक्सीन लेने के बाद हार्ट अटैक का खतरा 4 से 5 फीसदी बढ़ गया है. कोविड संक्रमण दिल के दौरे के लिए एक मुख्य कारण है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि इस बात आशंका कम है कि कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट ने टीके से बनी इम्युनिटी को खत्म कर सके, लेकिन लगातार निगरानी रखना जरूरी है. 

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क्या कहते हैं डॉक्टर?
वहीं, डॉक्टरों का भी मानना है कि कोविड मनुष्य के शरीर में किसी भी प्रणाली को प्रभावित कर सकता है. नेशनल हार्ट इंस्टीट्यट के डॉक्टर बिक्रम केशरी मोहंती का कहना है कि कोरोना की वजह से मुख्य रूप से फेफड़े और फिर हार्ट पर इसका प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि संक्रमण सूजन पैदा करके पूरे दिल (ह्रदय की मांसपेशियों) को प्रभावित कर सकता है और बॉडी के किसी भी अंग को नुकसान पहुंचा सकता है.

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कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर पारदर्शी रहे 
चीन ने मंगलवार को कहा कि वह कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खोज के संबंध में पारदर्शी" रहा है. इसने अमेरिकी आलोचना को खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग माओ ने कहा, "चीन ने वायरस का पता लगाने पर सबसे अधिक डेटा और अनुसंधान परिणाम साझा किए और संबंधित अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया." माओ ने अमेरिकी अधिकारियों और कांग्रेस के सदस्यों की शिकायतों के जवाब में कहा, "वायरस का पता लगाने के मुद्दे का राजनीतिकरण करने से चीन बदनाम नहीं होगा, बल्कि यह अमेरिका की खुद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाएगा." ऐसी आशंकाएं जताई जाती रही हैं कि कोरोना वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से लीक हुआ था.

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