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Covid Vaccine से हुई मौत पर क्या है मुआवजे की नीति? सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से क्यों मांगा ऐसा जवाब

Covid Vaccine के कारण लोगों की मौत होने के दावे बहुत सारे लोगों ने किए हैं, लेकिन अब तक यह बात साबित नहीं हो सकी है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का इसके चलते होने वाली मौत की मुआवजा नीति के बारे में पूछना बेहद अहम माना जा रहा है.

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Covid Vaccine से हुई मौत पर क्या है मुआवजे की नीति? सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से क्यों मांगा ऐसा जवाब
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Covid Vaccine ने चार साल पहले पूरी दुनिया में लाखों लोगों की मौत का कारण बनी कोराना वायरस (Corona Virus) महामारी से निजात दिलाने का काम किया था. हालांकि इसके बाद लोगों के चलते-चलते हार्ट अटैक आदि से मर जाने की घटनाएं बड़े पैमाने पर बढ़ी हैं. बहुत सारे लोगों ने इसके लिए कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को जिम्मेदार बताया है, लेकिन अब तक यह बात साबित नहीं हो सकी है. इसके बावजूद गुरुवार को एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह पूछा है कि कोविड वैक्सीन के कारण होने वाली मौत पर मुआवजा देने की क्या नीति है? 

केंद्र सरकार को दिया गया है तीन सप्ताह का समय
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केरल की सईदा नाम की महिला से जुड़े मामले पर सुनवाई की है. सईदा ने अपने पति की मौत के लिए कोविड वैक्सीन को जिम्मेदार बताते हुए मुआवजे की मांग की है. इस पर बेंच ने मोदी सरकार से यह जवाब मांगा है कि क्या कोविड वैक्सीन से होने वाली मौत का मुआवजा देने की कोई नीति है? यदि नीति नहीं है तो क्या वह ऐसी मौत का मुआवजा देने के लिए कोई नीति बनाएगी? बेंच ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद 18 मार्च को मामले में फिर से सुनवाई की जाएगी.

हाई कोर्ट ने दिया था महिला के पक्ष में फैसला
सईदा ने अपने पति की मौत कोविड वैक्सीन से होने का दावा करते हुए केरल सरकार से मुआवजा मांगा था. वहां से मुआवजा नहीं मिलने पर सईदा ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाई कोर्ट ने साल 2022 में इस मामले में सईदा के पक्ष में फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने कोविड वैक्सीन के कारण होने वाली मौत पर मुआवजा देने की नीति बनाने का आदेश नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) को दिया था. 

केंद्र ने किया था फैसले का विरोध
केरल हाई कोर्ट के फैसले का केंद्र सरकार ने विरोध किया था. केंद्र सरकार का कहना था कि कोरोना महामारी से होने वाली मौत और कोविड वैक्सीन से होने वाली मौत को एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है. इसके बाद केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साल 2023 में केरल हाई कोर्ट के फैसले को स्टे कर दिया था. इसके बाद से मामले में सुनवाई चल रही है. गुरुवार को इसी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

ICMR ने की थी कोविड वैक्सीन से मौत के दावों पर रिसर्च
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी ने कोविड वैक्सीन से होने वाली मौत को लेकर एक रिसर्च की थी. यह रिसर्च 1 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च, 2023 के बीच 18 से 45 साल की उम्र के ऐसे लोगों पर की गई थी, जिनकी स्वस्थ होने के बावजूद अचानक मौत हो गई थी. देश के 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 47 अस्पतालों में अचानक मौत वाले 729 केस और हार्ट अटैक के बावजूद बचा लिए गए 2916 केस के सैंपल जांचे गए थे. इनमें पाया गया था कि मौत का कारण कोविड वैक्सनी नहीं बल्कि 5 अन्य फैक्टर थे. यह रिसर्च केंद्र सरकार ने संसद में भी पेश की थी. 

सुप्रीम कोर्ट में पहले भी लंबित है मुआवजे से जुड़ी याचिका
सुप्रीम कोर्ट में कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा मांगने की एक और याचिका लंबित है. उस मामले में केंद्र सरकार ने कोविड वैक्सीन कार्यक्रम को स्वैच्छिक बताया था. साथ ही कहा था कि वैक्सीन लगवाना अनिवार्य नहीं था, इस कारण उसके साइड इफेक्ट्स के लिए सरकार से मुआवजा मांगना गलत है.

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