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दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग की गई, लेकिन बारिश नहीं हुई

आईएमडी के अनुसार, दिल्ली में 53 साल बाद कृत्रिम बारिश कराने और प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग के परीक्षण किए गए, लेकिन बारिश दर्ज नहीं की गई.

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दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग की गई, लेकिन बारिश नहीं हुई

दिल्ली क्लाउड सीडिंग अपडेट

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च दशक से भी ज़्यादा समय बाद, मंगलवार को दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने और राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने के प्रयास में क्लाउड सीडिंग का परीक्षण किया गया. दिल्ली सरकार ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से बुराड़ी, उत्तरी करोल बाग, मयूर विहार और बादली में यह परीक्षण किया.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि देर शाम तक राजधानी में कोई बारिश दर्ज नहीं की गई. हालाँकि, पीटीआई द्वारा उद्धृत एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन स्थानों पर परीक्षण किए गए, वहाँ पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में लगभग 10 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 0.1 मिमी और 0.2 मिमी की हल्की बारिश दर्ज की गई.

दिल्ली क्लाउड सीडिंग: प्रयास विफल क्यों हुआ?
दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्याप्त वायुमंडलीय नमी का अभाव बारिश न होने का मुख्य कारण था. रिपोर्ट में कहा गया है, "आईएमडी और अन्य एजेंसियों द्वारा अनुमानित नमी की मात्रा 10-15 प्रतिशत के निचले स्तर पर रही, जो क्लाउड सीडिंग के लिए आदर्श नहीं है."
 
सीडिंग से पहले, मयूर विहार में पीएम 2.5 का स्तर 221, करोल बाग में 230 और बुराड़ी में 229 था. इस प्रक्रिया के बाद, ये स्तर थोड़ा कम होकर क्रमशः 207, 206 और 203 हो गए. इसी तरह, पीएम 10 का स्तर भी औसतन 207 से घटकर लगभग 170 हो गया.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्लाउड सीडिंग से स्थानीय कणिकीय पदार्थों की सांद्रता कम करने में मदद तो मिली, लेकिन कम आर्द्रता के कारण समग्र परिस्थितियाँ निरंतर वर्षा के लिए अनुकूल नहीं थीं. पर्यावरणविदों ने इस पहल को एक अल्पकालिक उपाय बताया है जो अस्थायी राहत तो देता है, लेकिन दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के गहरे कारणों का समाधान नहीं करता.

दिल्ली में क्लाउड सीडिंग परीक्षण कैसे किए गए?
अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को क्लाउड सीडिंग के दो दौर चलाए गए. पहला परीक्षण दोपहर लगभग 2 बजे शुरू हुआ और दूसरा शाम 4 बजे मेरठ से उड़ान भरने वाले सेसना विमान का उपयोग करके किया गया. विमान में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड फ्लेयर्स लगे थे, जिनमें से प्रत्येक का वजन 2 से 2.5 किलोग्राम के बीच था, जिन्हें बादलों में संघनन पैदा करने के लिए लगभग 18 मिनट तक जलाया गया.

इस अभियान में खेकड़ा और बुराड़ी के उत्तर के बीच लगभग 25 समुद्री मील का एक गलियारा शामिल था, जहाँ 4,000 से 6,000 फीट की ऊँचाई पर फ्लेयर्स छोड़े गए. पर्याप्त वर्षा न होने के बावजूद, आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने आशा व्यक्त की और कहा कि प्रयोग व्यवस्थित रूप से किए गए और प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई.
 
सरकार ने कहा कि मौसम की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में वह ऐसे 10 और परीक्षण करने की योजना बना रही है.

दिल्ली क्लाउड सीडिंग: आप की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी (आप) ने इस पहल का मज़ाक उड़ाया और इसे वैज्ञानिक समाधान के बजाय सिर्फ़ प्रचार का हथकंडा बताया. आप नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार शहर की लंबे समय से चली आ रही प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के बजाय "इंद्रदेव का श्रेय चुराने" की कोशिश कर रही है. हालाँकि, भाजपा ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे प्रदूषण कम करने का एक "वैज्ञानिक और परिणामोन्मुखी" कदम बताया.

इस बीच, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ और AQI 301 (बहुत खराब) से घटकर 294 (खराब) हो गया.

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