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'मेरे अधिकारों से खिलवाड़ न करें,' चर्चा में जस्टिस चंद्रचूड़ का बयान, जानिए कैसी न्यायपालिका चाहते हैं CJI

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ अपने बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं. उनके एक बयान वह विवाद छिड़ा है.

'मेरे अधिकारों से खिलवाड़ न करें,' चर्चा में जस्टिस चंद्रचूड़ का बयान, जानिए कैसी न्यायपालिका चाहते हैं CJI
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डीएनए हिंदी: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के उन जजों में शुमार हैं, जिन्हें अदालत के आंतरिक प्रोटोकॉल में जरा सी भी उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होता है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान उन्होंने एक वकील को चेतावनी दी कि वह उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ न करें. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के लहजे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि जजों का कड़ा व्यवहार, आम जनता को कानून से दूर करता जा रहा है. 

सुप्रीम कोर्ट में एक केस की तत्काल सुनवाई के लिए मेंशनिंग के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपना आपा खो दिया और वकील से कह बैठे कि मेरे अधिकार से खिलवाड़ न करें. जस्टिस चंद्रचूड़ न्यायिक कार्यवाही के दौरान ऐसा कम करते हैं.

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किस बयान पर भड़का है हंगामा?

एक वकील ने सु्प्रीम कोर्ट से अपने केस की अर्ली मेंशनिंग की मांग की थी. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इसे 17 अप्रैल को सुनवाई के लिए लिस्टेड किया जाएगा. इसके बावजूद वकील ने किसी अन्य बेंच के सामने केस के मेंशनिंग की इजाजत मांगी तो CJI भड़क गए.

वकील ने कहा, 'अगर इजाजत हो तो क्या मैं दूसरी पीठ के सामने इस मामले की मेंशनिंग कर सकता हूं.? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'मेरे साथ यह खेल मत खेलिए. आप जल्दी सुनवाई के लिए पहले यहां फिर कहीं और इसे मेंशन नहीं कर सकते हैं.'

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कैसी न्यायपालिका चाहते हैं जस्टिस DY चंद्रचूड़?

जस्टिस चंद्रचूड़ न्यायपालिका की स्वतंत्रा चाहते हैं. वह अक्सर कहते हैं कि न्यायपालिका और 
विधायिका के बीच हस्तक्षेप की स्थिति नहीं होनी चाहिए. हालांकि वह यह भी चाहते हैं कि दोनों संस्थाएं एक-दूसरे के सहयोग में बाधा न बनें. जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना है कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बीच सहयोग की एक बारीक रेखा बनी रहे लेकिन तीनों संस्थाएं स्वतंत्र रूप से अपना काम करती रही हैं, चेक एंड बैलैंस बना रहे, तभी संवैधानिक लोकतंत्र कायम रह सकता है. 

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