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13 दिन से केरल में खड़े F-35 की खामी नहीं पकड़ सके ब्रिटिश इंजीनियर, यही जेट भारत को बेच रहे ट्रंप, पढ़ें 5 पॉइंट्स

Kerala News: केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर ब्रिटेन की रॉयल नेवी के यूएस मेड F-35B फाइटर जेट को 12 दिन पहले इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. तब से उसके इंजीनियर दुनिया के इस सबसे महंगे फाइटर जेट की कमी नहीं पकड़ पाए हैं.

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13 दिन से केरल में खड़े F-35 की खामी नहीं पकड़ सके ब्रिटिश इंजीनियर, यही जेट भारत को बेच रहे ट्रंप, पढ़ें 5 पॉइंट्स
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Kerala News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) जो फाइटर जेट भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को बेचने का दबाव लगातार बना रहे हैं, उसकी टेक्नोलॉजी इतनी जटिल है कि ब्रिटिश इंजीनियरों के समझ ही नहीं आ रही है. करीब 12 दिन पहले केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करने वाले ब्रिटेन की रॉयल नेवी के F-35B फाइटर जेट को उसके इंजीनियर अब तक ठीक नहीं कर पाए हैं. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के पहरे में एयरपोर्ट पर खड़े इस फाइटर जेट को ठीक करने में एक खास डर के कारण ब्रिटेन भारत की मदद भी नहीं ले पा रहा है, लेकिन उसके अपने इंजीनियर अब तक फाइटर जेट के लैंड करने का कारण नहीं समझ सके हैं. दो सप्ताह बाद आखिरकार बेंगलुरु स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन ने भी मान लिया है कि फाइटर जेट में इंजीनियरिंग से जुड़ी दिक्कत है, जो तलाशी जा रही है.

चलिए आपको 5 पॉइंट्स में बताते हैं कि पूरा मामला क्या है-

1. ब्रिटिश नेवी के वॉर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है ये फाइटर जेट
ब्रिटिश रॉयल नेवी के HMS प्रिंस ऑफ वेल्स करियर स्ट्राइक ग्रुप के F-35B फाइटर जेट को करीब 12 दिन पहले 14 जून की रात में अचानक तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. यह करियर स्ट्राइक ग्रुप इंडो-पैसेफिक रीजन में तैनात है, जो भारतीय नेवी (Indian Navy) के साथ जॉइंट मैरीटाइम एक्सरसाइज में शिरकत कर रहा था. इसके बाद से यह फाइटर जेट दोबारा उड़ान नहीं भर सका है.

2. ब्रिटिश इंजीनियरों की टीम नहीं पकड़ पा रही खराबी
इस फाइटर जेट में क्या कराबी आई है, यह समझने की कोशिश पिछले 14 दिन से ब्रिटिश इंजीनियरों की एक टीम कर रही है, लेकिन अब तक उनकी समझ में कुछ नहीं आया है. एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के इंजीनियरों के इसे ठीक करने में फेल होने के बाद ब्रिटेन से भी 30 इंजीनियरों की एक टीम पहुंची है, लेकिन फिलहाल इस जेट के जल्दी दोबारा उड़ान भरने के आसार नहीं लग रहे हैं.

3. क्या बताया है ब्रिटिश हाई कमीशन ने
ब्रिटिश हाई कमीशन ने मीडिया से फाइटर जेट में इंजीनियरिंग से जुड़ी खामी होने की बात साझा की है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश हाई कमीशन ने कहा है कि ब्रिटेन का F-35 एयरक्राफ्ट खराब मौसम के कारण HMS प्रिंस ऑफ वेल्स पर वापस नहीं लौट सका था. सुरक्षा के नाते फाइटर जेट की तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई थी. लैंड करने के बाद एयरक्राफ्ट में इंजीनियरिंग से जुड़ी कोई खामी पैदा हो गई है, जिसके चलते यह करियर पर नहीं लौट पा रहा है. हाई कमीशन ने आगे कहा है कि एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के इंजीनियरों ने जेट की जांच की है और तय किया है कि इसे वापस ले जाने के लिए ब्रिटेन से इंजीनियरिंग टीम बुलाने की जरूरत होगी. फिलहाल हमारे पास मरम्मत किए जा रहे विमान के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं है. एयरपोर्ट के नियमित संचालन में व्यवधान को कम करने के लिए ब्रिटेन से इंजीनियरिंग टीम और एक्सपर्ट उपकरण आने के बाद एयरक्राफ्ट को मेंटिनेंस रिपेयरिंग और ओवरहालिंग के लिए एक हैंगर में शिफ्ट किया जाएगा. 

4. रॉयल नेवी ने टेक्नोलॉजी चोरी के डर से नहीं ली भारत की मदद?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फाइटर जेट के कारण तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशंस में आ रही समस्या के चलते भारत ने उसे शिफ्ट करने में मदद की पेशकश की थी. रॉयल नेवी के सूत्रों ने बताया था कि एअर इंडिया (Air India) ने फाइटर जेट को हैंगर में शिफ्ट करके इसके मेंटिनेंस रिपेयर और ओवरहॉल या MRO में मदद की पेशकश की थी, जिसे रॉयल नेवी ने ठुकरा दिया. रॉयल नेवी को फाइटर जेट को हैंगर में शिफ्ट करने पर उसकी 'Protected Technologies' के चोरी होने का डर था.

5. दुनिया का सबसे महंगा और एडवांस फाइटर जेट
अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी का डेवलप किया हुआ F-35 फाइटर जेट दुनिया का पांचवी पीढ़ी का इकलौता स्टील्थ जेट माना जाता है. हालांकि अब चीन ने भी इस पीढ़ी का एक फाइटर जेट डेवलप कर लेने का दावा किया है. केरल में इसका F-35B वर्जन खड़ा है, जिसे नेवी एयरक्राफ्ट करियर के लिहाज से डिजाइन किया गया है. करीब 712 करोड़ रुपये के इस फाइटर जेट की लंबाई 51.2 फीट, ऊंचाई 14.3 फीट और विंग स्पैन 35 फीट है. यह करीब 1975 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से उड़ सकता है और करीब 6,800 किलोग्राम वजन के हथियार अपने साथ ले जा सकता है. यह F-35 मॉडल का शॉर्ट टेकऑफ/वर्टिकल लैंडिंग (STOVL) वैरिएंट है, जो छोटे रनवे या एयरक्राफ्ट करियर से आसानी से उड़ान भर सकता है. इसे लाइटनिंग नाम से जाना जाता है. इस फाइटर जेट को लॉकहीड मार्टिन ने 2006 में बनाना शुरू किया था और साल 2015 में यूएस एयरफोर्स ने इसे अपने स्क्वॉड्रन का हिस्सा बनाया था. 

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