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Delhi: AIIMS में बढ़ाया जा सकता है ब्लड सैंपल लेने का टाइम, राउंड द क्लॉक लैब चलाने पर हो रहा विचार

ब्लड सैंपल देने का समय शाम साढ़े तीन बजे तक तय है लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय अब इसे बढ़ाकर शाम साढ़े छह बजे तक करने पर विचार कर रहा है.

Delhi: AIIMS में बढ़ाया जा सकता है ब्लड सैंपल लेने का टाइम, राउंड द क्लॉक लैब चलाने पर हो रहा विचार
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डीएनए हिंदी: दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर है. दरअसल एम्स (AIIMS) में ब्लड सैंपल देने के समय में और इजाफा करने पर विचार चल रहा है. अब शाम साढ़े छह बजे तक सैंपल लिया जा सकता है. इसके अलावा लैब को राउंड द क्लॉक यानी 24 घंटे चलाने पर भी चर्चा की जा रही है.

जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों एम्स में सुधार और मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने फैकल्टीज के साथ गंभीर चर्चा की थी जिसमें ब्लड सैंपल की सुविधा को और बढ़ाए जाने पर बातें की गई. इस दौरान डॉक्टरों ने नीट के साथ एम्स के एग्जाम जोड़ने से सेशन में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया और एम्स में मेडिकल इंस्ट्रूमेंट मेड इन इंडिया के तहत खरीदने की बाध्यता का हल निकालने की मांग भी की.

ओपीडी बेसिस पर इलाज में होती है परेशानी
बता दें कि एम्स में ओपीडी बेसिस पर इलाज मिलने में मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसे लेकर पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर एम्स में डॉक्टर शिव कुमार चौधरी के नतृत्व में एक कमिटी का गठन किया गया था. रिपोर्ट के बाद एम्स प्रशासन ने ओपीडी के लिए ब्लड सैंपल के समय में बदलाव किया था. पहले एम्स की ओपीडी में सुबह साढ़े दस बजे तक ही सैंपल दिया जा सकता था लेकिन पिछले साल 21 सितंबर को जारी आदेश में ब्लड सैंपल देने का समय शाम साढ़े तीन बजे तक कर दिया गया. 

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हालांकि अभी भी मरीजों को दिक्कत होती है जो मरीज दोपहर के बाद लगने वाले स्पेशल क्लीनिक में इलाज के लिए आते हैं, उन्हें ब्लड सैंपल देने के लिए दूसरे दिन फिर आना पड़ता है. यही कारण है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ब्लड सैंपल का समय शाम साढ़े छह बजे तक करने पर विचार कर रहा है, ताकि मरीज एक ही दिन में डॉक्टर को दिखा भी लें और अपना सैंपल भी दे सकें.

टेली मेडिसिन पर जोर 
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स में होने वाली भीड़ को कम करने के लिए टेली मेडिसिन पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि इसपर और काम करने की जरूरत है ताकि ऐसे मरीज जिनका इलाज बिना एम्स आए संभव है, उन्हें टेली मेडिसिन तकनीक की मदद से इलाज मिल जाए.

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