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दिल्ली सरकार ने सभी निजी और सरकारी ऊंची इमारतों में एंटी-स्मॉग गन 29 सितंबर तक लगाने का सरकार ने निर्देश जारी किया है.
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब एंटी स्मॉग गन बिल्डिंग्स पर लगाने होंगे, खासकर ठंड में जब पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे हानिकारक कण काफी बढ़ जाते हैं. दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि G+5 मंजिल और उससे अधिक ऊंचाई वाली सभी निजी और सरकारी इमारतों में 29 नवंबर तक एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य होगा.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इस निर्देश का उद्देश्य दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटना है, खासकर सर्दियों के महीनों में जब पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे हानिकारक कण काफी बढ़ जाते हैं.
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, सभी व्यावसायिक परिसरों, शॉपिंग मॉल, होटलों, कार्यालय भवनों, शैक्षणिक संस्थानों और 3,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले अन्य ऊँची इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य है. हालाँकि, आवासीय भवनों, सोसाइटियों और परिसरों को इस आदेश से छूट दी गई है.
प्रत्येक भवन के निर्मित क्षेत्र के आधार पर आवश्यक एंटी-स्मॉग गन की संख्या अलग-अलग होगी
10,000 वर्ग मीटर से कम निर्मित क्षेत्रफल वाली संपत्तियों के लिए कम से कम तीन बंदूकें लगाना अनिवार्य है. नोटिस में कहा गया है कि 10,001 से 15,000 वर्ग मीटर के बीच निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों में कम से कम चार बंदूकें और 15,001 से 20,000 वर्ग मीटर के बीच निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों में कम से कम पाँच बंदूकें लगानी होंगी.
20,001 से 25,000 वर्ग मीटर तक की संपत्तियों में कम से कम छह एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त प्रत्येक 5,000 वर्ग मीटर के लिए, एक अतिरिक्त एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य है. यह नियम सभी व्यावसायिक भवनों, मॉल, होटलों, कार्यालय परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों (विश्वविद्यालयों सहित) और G+5 मंजिलों या उससे अधिक ऊँची अन्य संरचनाओं पर लागू होता है.सरकार समय-समय पर निर्धारित अनुसार अन्य संरचनाओं को भी विनियमन के अंतर्गत शामिल कर सकती है.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता निवासियों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचाना है, खासकर सर्दियों के आगमन के साथ. हर आवश्यक कदम उठाया जा रहा है और उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. एंटी-स्मॉग गन वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यह सरकार दिल्ली के लोगों को एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है."
डीपीसीसी ने स्पष्ट किया कि एंटी-स्मॉग गन 15 जून से 1 अक्टूबर तक मानसून अवधि को छोड़कर पूरे वर्ष चालू रहनी चाहिए. मंत्री ने कहा कि स्थापना और संचालन में अधिकारियों द्वारा जारी विस्तृत दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए.
इस विनियमन के पूर्ण अनुपालन की समय सीमा 29 नवंबर, 2025 निर्धारित की गई है, जिससे भवन मालिकों और सुविधा प्रबंधकों को अधिसूचना की तारीख से छह महीने का समय मिलेगा ताकि वे स्थापना पूरी कर सकें और यह सुनिश्चित कर सकें कि सभी उपकरण पूरी तरह से चालू हैं.
डीपीसीसी ने सभी संबंधित पक्षों से अनुपालन की समय-सीमा को पूरा करने और दंड से बचने के लिए बिना किसी देरी के कार्रवाई करने का पुरजोर आग्रह किया है.
एंटी-स्मॉग गन क्या है?
एक एंटी-स्मॉग गन एक उपकरण जो वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वातावरण में पानी की बारीक बूंदें छिड़कता है यह धूल और कण पदार्थों, जैसे कि PM2.5 और PM10, के साथ जुड़कर काम करता है , जिससे वे ज़मीन पर गिरने लायक भारी हो जाते हैं. इन उपकरणों को स्मॉग कैनन या मिस्ट कैनन भी कहा जाता है, और इनका इस्तेमाल निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सड़कों पर धूल को दबाने और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाता है.
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