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Ankita Bhandari Murder Case में कोर्ट ने सुनाया फैसला, पूर्व BJP नेता के बेटे समेत तीनों आरोपियों को दी उम्रकैद

Ankita Bhandari Murder Case: अंकिता भंडारी की हत्या ऋषिकेश के पास एक रिजॉर्ट में साल 2022 में कर दी गई थी, जिसमें पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य समेत 3 आरोपी बनाए गए थे. यह रिजॉर्ट पुलकित आर्य का ही था.

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Ankita Bhandari Murder Case में कोर्ट ने सुनाया फैसला, पूर्व BJP नेता के बेटे समेत तीनों आरोपियों को दी उम्रकैद
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Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश को उद्वेलित करने वाले तीन साल पुराने अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari)  हत्याकांड में शुक्रवार को कोटद्वार की एक अदालत ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस हत्याकांड के तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही तीनों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. पुलकित आर्य भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है, जिसके रिजॉर्ट में साल 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या की गई थी. 19 साल की अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास बने रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी, जिसे पुलकित और उसके साथियों ने चीला नहर में धकेलकर हत्या कर दी थी. दावा किया गया था कि पुलकित ने अंकिता पर अपने गेस्ट हाउस पर आए कुछ 'वीआईपी' मेहमानों का दैहिक मनोरंजन करने का दबाव बनाया था, लेकिन अंकिता ने इससे इंकार करते हुए यह बात सभी को बताने की धमकी दी थी. इसके बाद ही उसकी हत्या की साजिश रची गई थी.

इन धाराओं में साबित हुए आरोप और यह मिली है सजा
अंकिता मर्डर केस (Ankita Murder Case) में कोटद्वार एडीजे कोर्ट ने मुकदमा अपराध संख्या 1/22 में तीनों आरोपियों को धारा 302, 201, 354 ए IPC और 3(1)d अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है. तीनों को निम्न सजा सुनाई गई है-

  • पुलकित आर्य: मुख्य आरोपी पुलकित को IPC की धारा 302 के तहत कठोर आजीवन कारावास व 50000 रुपये जुर्माना, IPC की धारा 201 के तहत 5 वर्ष कठोर कारावास व 10000 रुपए जुर्माना, IPC की धारा 354 ए के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास व 10000 रुपये जुर्माना और धारा 3(1)d ITPA Act के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 2000 रुपये का जुर्माना.
  • सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता: IPC की धारा 302 के तहत आजीवन कठोर कारावास व 50000 रुपए जुर्माना, धारा 201 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 10000 रुपये जुर्माना और 3(1)d आईटीपीए एक्ट के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 2000 रुपये का जुर्माना.
  • इसके अलावा आरोपियों से 4 लाख प्रतिकर भी वसूला जाएगा, जो अंकिता के परिजनों को दिया जाएगा.

Ankita

कोर्ट के बाहर मौजूद थी हजारों की भीड़
इस केस की सुनवाई कोर्ट ने 19 मई को पूरी कर ली थी. इसके बाद फैसले के लिए 30 मई की तारीख तय की गई थी. इसके चलते बहुत दूर-दूर से लोग कोटद्वार कोर्ट परिसर पहुंचे थे. हजारों की भीड़ कोर्ट के बाहर फैसले का इंतजार कर रही थी. फैसला आने में देरी होते देखकर भीड़ का सब्र भी टूटता दिखाई दिया, जब भारी संख्या में लोगों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर कोर्ट में घुसने की कोशिश की. हालांकि पहले से भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने हालात संभाल लिए.

दो साल 8 महीने बाद आया केस का फैसला
अंकिता की हत्या की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 97 गवाह बनाए गए थे. हालांकि आखिर में अभियोजन ने 47 गवाहों की ही गवाही कराई थी. कोर्ट ने 28 मार्च, 2023 को तीनों आरोपियों पर आरोप तय करने के बाद ट्रायल शुरू किया था. अब करीब 2 साल 8 महीने तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद फैसला सुनाया गया है. 

कैसे हुई थी हत्या, क्या था पूरा मामला
उत्तराखंड के तीर्थस्थल ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की 18 सितंबर, 2022 को हत्या कर दी गई थी. इसके बाद उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था, जो एक सप्ताह बाद बरामद हुआ था. रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने पुलिस को गुमराह करने के लिए 20 सितंबर, 2022 को अंकिता के लापता होने की रिपोर्ट राजस्व क्षेत्र पट्टी उदयपुर पल्ला में दर्ज कराई थी. इस मामले में लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद यह केस लक्ष्मण झूला थाना पुलिस को सौंप दिया गया था. पुलिस के सख्ती से पूछताछ करने पर पुलकित, सौरभ और अंकित ने अंकिता की हत्या करने की बात कबूल ली और उसका शव नहर में फेंकने की जानकारी दी. तीनों ने बताया कि अंकिता अनैतिक देह व्यापार करने के लिए तैयार नहीं थी और उनकी पोल खोलने की धमकी दे रही थी. इसी कारण उसे नहर में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद केस में अपहरण की धारा हटाकर हत्या की धारा बढ़ाई गई. साथ ही सबूत छिपाने और अनैतिक देह व्यापार अधिनिय आदि की धाराएं भी जोड़ी गईं. 24 सितंबर को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद हुआ. लोगों का गुस्सा भड़कने के बाद राज्य सरकार ने रिजॉर्ट को बुलडोजर चलाकर गिरवा दिया था. 24 सितंबर को ही एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, जिसने 16 दिसंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी.

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