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पेरेग्राइन फाल्कन को बोलचाल की भाषा में शाहीन बाज कहते हैं. यह अपने मजबूत धारदार नाखून और पंजों से शिकार को हवा में उड़ते ही पकड़ लेता है.
डीएनए हिंदी: बिहार में पिछले दिनों हुए एशियन वाटर बर्ड सेंचुरी सर्वे में बुद्धूचक (कहलगांव) के पास विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन के दियारा पर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भी तेज उड़ने वाला पेरेग्राइन फाल्कन (Peregrine falcon) यानी शाहीन बाज देखा गया जिसके बाद बिना देरी किए सर्वे टीम ने इसकी तस्वीर को कैमरे में कैद कर लिया.
वन पदाधिकारी भरत चिंतापल्ली की मानें तो यह पक्षी 320 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक रफ्तार से उड़ सकता है. इसके अलावा पेरेग्राइन फाल्कन की उड़ान की अधिकतम गति 450 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है
पदाधिकारी के अनुसार, सुरक्षित स्थान और भोजन की तलाश में कुछ बरसों से यह पक्षी विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन में पहुंच रहा है. यहां इसे 2-4 जोड़े के साथ देखा गया है.

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'390 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिक स्पीड से करता है शिकार'
इधर इसे लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान के गंगा प्रहरी स्पियर हेड दीपक कुमार ने बताया, पेरेग्राइन फाल्कन को बोलचाल की भाषा में शाहीन बाज कहते हैं. यह अपने मजबूत धारदार नाखून और पंजों से शिकार को हवा में उड़ते ही पकड़ लेता है. शिकार के वक्त इसकी स्पीड 390 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक होती है.
लंबे पंख उड़ने में करते हैं मदद
दीपक ने बताया, पेरेग्राइन फाल्कन के शरीर की लंबाई 13 से 23 इंच और पंख की लंबाई 29 से 47 इंच तक होती है. इसकी छाती मजबूत मांसपेशियों, लंबे पंख, स्ट्रीमलाइनर के कारण इसे तेज रफ्तार में उड़ने में मदद देते हैं. इसकी नाक पर ट्यूबर सेल्स होता है, इससे यह तेज रफ्तार में भी सांस ले सकता है. यह मूलतः उत्तरी अमेरिकी पक्षी है.
बता दें कि एशियन वाटर बर्ड सेंचुरी सर्वे 16 फरवरी को शुरू होकर 20 को समाप्त हुआ था. यह सर्वे पर्यावरण एवं वन विभाग बिहार सरकार, मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बिहार वेटलैंड ने किया था. जिले में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन के अलावा यह सर्वे जगतपुर झील, बाहात्रा झील, गंगा प्रसाद और दियारा झील में किया गया.

बिहार सरकार का भागलपुर में प्रस्तावित पक्षी महोत्सव 2022 कोरोना के कारण नहीं हो पाया. अब गर्मी आते ही प्रवासी पक्षी अपने मूल क्षेत्र की ओर लौटने लगेंगे. वन पदाधिकारी भरत चिंतापल्ली ने बताया, कोरोनाकाल में सरकार ने आयोजन पर पाबंदी लगाई थी. विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन क्षेत्र के अलावा जिले में लगभग 100 तरह से अधिक प्रवासी पक्षियों का समागम नवंबर से मार्च तक लगता है.
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