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काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद का जल्द होगा निपटारा! इलाहाबाद HC 29 मार्च से करेगा नियमित सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले में 29 मार्च से लगातार सुनवाई करेगा.

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद का जल्द होगा निपटारा! इलाहाबाद HC 29 मार्च से करेगा नियमित सुनवाई
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डीएनए हिंदीः इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) काशी विश्वेश्वर नाथ मंदिर (Kashi Vishweshwar Nath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (Gyanvapi Masjid Dispute) को लेकर याखिल याचिका पर 29 मार्च से  नियमित सुनवाई करेगा. फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के सर्वे कराने के वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगा रखी है. कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील की ओर से दलील दी गई कि भगवान विश्वेश्वर का मंदिर प्राचीन काल अर्थात सतयुग से अस्तित्व में है और स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर उस विवादित ढांचे में विराजमान हैं. इसलिए विवादित जमीन स्वयं में भगवान विश्वेश्वर का एक आंतरिक भाग है 

नहीं लागू होता 1991 का कानून
केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि मंदिर का आकार चाहे जो भी हो, भूतल का तहखाना अब भी वादी के कब्जे में है जोकि 15वीं शताब्दी से पूर्व निर्मित मंदिर का ढांचा है. साथ ही उस पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र जो 15 अगस्त, 1947 के दिन था, वैसा ही बना हुआ है. इसलिए पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के प्रावधानों को यहां लागू नहीं किया जा सकता. 

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क्या है मामला 
1991 में वाराणसी की जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल कर यह आरोप लगाया गया कि वाराणसी शहर के चौक इलाके की ज्ञानवापी मस्जिद अवैध तरीके से बनी है. मस्जिद की जगह पहले मंदिर स्थापित था और मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने शासनकाल में मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण कराया था. यह अर्जी एंसिएंट आइडल आफ स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के मित्र के तौर पर वाराणसी के ही विजय शंकर रस्तोगी ने दाखिल की थी. यह अर्जी अयोध्या मंदिर के विवाद की तर्ज पर दाखिल की गई थी. 

क्यों हो रहा विरोध 
ज्ञानवापी मस्जिद इंतजामिया कमेटी की तरफ से दो आधार पर इस अर्जी का विरोध किया गया था. पहली दलील यह दी गई कि 1991 के धार्मिक स्थलों पर बने नए एक्ट के लागू होने के बाद इस तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, तो दूसरी दलील यह दी गई कि देश की आजादी के वक्त के स्टेटस को बदलने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती है. ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी के चौक इलाके में काशी विश्वनाथ मंदिर के नजदीक ही है. इसका विवाद भी अयोध्या की तरह ही काफी पुराना है.

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