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UPPCS 2013 Controversy: अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते यूपी में सरकारी भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर गरमा रहा है. ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव पर सख्त निशाना साधते हुए ये मुद्दा उठाया है.
डॉ. सुनील कुमार मिश्र: अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते यूपी में सरकारी भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर गरमा रहा है. योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव पर सख्त निशाना साधते हुए ये मुद्दा उठाया है. सपा सरकार में हुई भर्ती गड़बड़ियों का मुद्दा जब भी उठता है तब एक किस्सा बहुत चर्चा में आता है, जब सपा नेता और मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव की बहू रिचा अहलूवालिया का एग्जाम सेंटर रातोंरात बदल दिया गया था.
यह मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित पीसीएस-2013 प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा था. आरोप लगाए गए कि परीक्षा से ठीक पहले रामगोपाल यादव की बहू रिचा अहलूवालिया का परीक्षा केंद्र रातोंरात कथित तौर पर गाजियाबाद से बदल दिया गया, उन्हें उनकी मनमुताबिक जगह सेंटर दिया गया. इसे लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए थे.
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दरअसल, UPPCS-2013 भर्ती प्रक्रिया पहले से ही विवादों में थी. आयोग की कार्यप्रणाली और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इन्हीं याचिकाओं में रिचा अहलूवालिया के परीक्षा केंद्र बदले जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि तत्कालीन सपा सरकार के दौरान राजनीतिक दबाव में परीक्षा केंद्रों में हेरफेर और चयन प्रक्रिया में पक्षपात किया गया था. उस समय उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव थे, जिनके कार्यकाल में आयोग की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे.
इस पूरे विवाद ने इतना तूल पकड़ा था कि आयोग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग भी उठी. आरोप लगाए गए कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी थी और सत्ता से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में मनमाना बदलाव किया जा रहा था. विपक्षी दलों और कई अभ्यर्थियों ने दावा किया था कि यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र बदलने तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे आयोग की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए थे.
उस दौर में यूपीपीएससी की कई भर्तियां विवादों में रहीं. आरोप यह भी लगे कि चयन प्रक्रियाओं में जातीय और राजनीतिक प्रभाव हावी था. गैर-यादव पिछड़े वर्ग और सामान्य अभ्यर्थियों के बीच यह धारणा मजबूत हुई कि सत्ता से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल रहा है. UPPCS-2013 विवाद आज भी उन मामलों में गिना जाता है, जिसने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे.
इस दौरान भर्तियों में गड़बड़ी का आलम ये था कि हाईकोर्ट ने अनिल यादव की लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति को ही रद्द कर दिया था और सपा सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि अखिलेश सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर अनिल यादव की नियुक्ति की थी.
(लेखक अतर्रा पीजी कॉलेज बांदा में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.)
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