भारत
Ahmedabad Plane Crash के बाद मुआवजे को लेकर भी तमाम तरह की बातें हो रही हैं. जिक्र इस घटना के बाद मुआवजे का हुआ है, तो हमारे लिए भी ये जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि आखिर ऐसी घटनाओं को लेकर एयरलाइंस कंपनियों के नियम क्या हैं?
अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एयर इंडिया के विमान हादसे के बाद भले ही जांच के आदेश दे दिए गए हों. लेकिन बातों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. तरह तरह की बातों के बीच सवाल ये भी हो रहा है कि इस हादसे के बाद पीड़ित परिवारों को कितना मुआवजा मिलेगा?
ध्यान रहे विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों में आग के गोले में तब्दील हुआ था जिसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत 242 लोग सवार थे, जिसमें 10 क्रू मेंबर, 2 पायलट और 230 यात्री थे.
जिक्र इस घटना के बाद मुआवजे का हुआ है, तो हमारे लिए भी ये जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि आखिर ऐसी घटनाओं को लेकर एयरलाइंस कंपनियों के नियम क्या हैं?
ध्यान रहे कि अनहोनी कभी भी हो सकती है ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों और DGCA की तरफ से कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं.आगे कुछ कहने से पहले हमारे लिए ये बता देना भी बहुत जरूरी हो जाता है कि घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए ये नियम अलग-अलग है.
चूंकि अहमदाबाद प्लेन क्रैश के बाद मुआवजे को लेकर तमाम तर्क दिए जा रहे हैं इसलिए अंतर्राष्ट्रीय उड़ान में मृत्यु या शारीरिक चोट की अवस्था में, भारत में परिचालन करने वाली एयरलाइनें मॉन्ट्रियल कन्वेंशन, 1999 के नियम से बंधी हैं, जो एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिस पर भारत ने भी हस्ताक्षर किए हैं.
इस कन्वेंशन के तहत 128,821 तक विशेष आहरण अधिकार (SDR) यानी प्रत्येक यात्री के लिए लगभग 1.4 करोड़ रुपये दिया जाता है. यदि यह साबित होता है कि किसी हादसे के पीछे एयरलाइन की लापरवाही या फिर गलती है, मुआवजा और बढ़ सकता है.
गौरतलब है कि मुआवजा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों तक सीमित है मगर DGCA के दिशा निर्देशों के अनुसार, भारतीय विमानन कंपनियां अक्सर घरेलू मार्गों के लिए भी समान कवरेज प्रदान कर सकती हैं. यह मुआवजा एअरलाइंस और इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दिया जाता है.