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जानें क्यों प्राइवेट स्कूल में स्टूडेंट्स घटे, सरकारी स्कूलों में दाखिले 10 फीसदी बढ़े?

बिहार में प्राइवेट स्कूलों में 30-35 प्रतिशत बच्चे कम हुए हैं. वहीं यहां के सरकारी स्कूलों में 10 फीसदी बच्चों ने 2019 के मुकाबले ज्यादा दाखिला लिया.

जानें क्यों प्राइवेट स्कूल में स्टूडेंट्स घटे, सरकारी स्कूलों में दाखिले 10 फीसदी बढ़े?
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डीएनए हिंदी: कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर के बाद प्राइवेट स्कूलों की सेहत गिरती हुई जान पड़ रही है. देश के अलग-अलग राज्यों से स्कूलों के बंद होने की खबरें आ रही हैं. प्राइवेट स्कूलों में बड़े पैमाने पर टीचरों की छंटनियां भी हो रही हैं. वहीं सरकारी स्कूलों में छात्रों के दाखिले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. बिहार में प्राइवेट स्कूलों में 30-35 प्रतिशत बच्चे कम हुए हैं. वहीं यहां के सरकारी स्कूलों में 10 फीसदी बच्चों ने 2019 के मुकाबले ज्यादा दाखिला लिया है. छत्तीसगढ़ में 500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में ताला लग गए हैं. दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर 2.7 लाख बच्चों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाया है. प्राइवेट स्कूलों में छात्रों के दाखिले कम होने की वजहों में महामारी के दौरान लोगों का पलायन, अभिभावकों पर बेरोजगारी की मार, अभिभावकों की वेतन में भारी कटौती आदि बताई जा रही हैं.  

छत्तीसगढ़ में 500 प्राइवेट स्कूल बंद हुए

छत्तीसगढ़ में कोरोना का असर राज्य के प्राइवेट स्कूलों के भविष्य पर भी कहर बनकर टूटा है. कोरोना के दौरान स्कूल फीस की वसूली नहीं कर पा रहे हैं जिसके चलते सैकड़ों स्कूल बन्द हो चुके हैं और बहुत बड़ी संख्या में बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं. इसके अलावा स्कूलों में नए एडमिशन में काफी कम हो रहे हैं जिसके चलते करीब 500 निजी स्कूलों में ताले लग चुके हैं. यह जानकारी स्कूल प्रबंधकों ने प्रदेश के शिक्षा विभाग को लिखित तौर पर दी है. राजधानी रायपुर में अकेले 35 प्राइवेट स्कूल बंद हुए हैं. इसके साथ ही शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 20 हजार बच्चे भी मुफ्त शिक्षा से वंचित हो गए हैं.  

इस अंग्रेजी स्कूल में 40 सीट के लिए हजारों आवेदन आए

इन स्कूलों के बन्द होने के चलते राज्य में शुरू किए गए स्वामी आत्मानंद सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में केवल 40 सीटों पर दाखिले के लिए हजारों आवेदन पहुंचे है. प्रदेश में कुल 57 हजार प्राइवेट-गर्वनमेंट स्कूलों में 60 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं. इनमें अकेले 6,615 प्राइवेट स्कूल हैं जहां 15 लाख बच्चे पढ़ते हैं. इनमें 25 फीसदी सीटों पर आरटीआई के तहत 3,01,317 बच्चे पढ़ते हैं.

उत्तर प्रदेश में भी खराब हालात

राजधानी लखनऊ में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है. राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं. कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है. इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है. आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं.

बिहार के प्राइवेट स्कूलों का हाल बेहाल

प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद का कहना है कि बिहार के बड़े प्राइवेट स्कूलों में 90% विद्यार्थी पढ़ रहे हैं लेकिन मीडियम स्कूलों में बच्चों की संख्या 70 से 80% और छोटे में 50% ही रह गई है. एसोसिएशन से जुड़े 25 हजार स्कूलों में 500 सीबीएसई व आईसीएसई एफिलिएटेड स्कूलों की स्थिति बेहतर है. वहीं दूसरी ओर यह बताया जा रहा है कि हर सरकारी स्कूल में 8-10 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूलों से इधर आए हैं. 

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इस वजह से बढ़े दाखिले

दिल्ली सरकार के बगैर ट्रांसफर सर्टिफिकेट के एडमिशन देने की नीति लागू किए जाने और कोरोना महामारी के चलते राज्य में सरकारी स्कूलों में एडमिशन का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ा है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि बड़े बड़े प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चे एडमिशन ले रहे हैं. निजी स्कूलों के 2.7 लाख से अधिक छात्रों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले लिया है. वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूलों के संगठन का कहना है कि सरकार के इस नियम के चलते बगैर फीस भरे ही अभिभावकों ने अपने बच्चों के नाम सरकारी स्कूलों में दाखिला करवा दिए. एसोसिएशन का कहना है कि इससे प्राइवेट स्कूलों को 520 करोड़ का नुकसान हुआ है.  

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