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रईश खान | Jan 13, 2026, 08:19 PM IST
1.ISRO को लगा बढ़ा झटका

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को सोमवार को उस वक्त बड़ी निराशा हाथ लगी, जब PSLV-C62 अपने निर्धारित मांग से भटक गया. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) को लगभग 8 महीने में यह दूसरा झटका है.
2.PSLV-C62 भेजने का क्या था मकसद

PSLV-C62 का उद्देश्य EOS-N1 नामक एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट को स्पेस में भेजना था, जिसे डीआरडीओ ने रणनीतिक उद्देश्य के लिए विकसित किया था. यह सैटेलाइट भारत की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाती. जिसका फायदा खेती, शहरी मैपिंग और पर्यावरण ऑब्जर्वेशन के लिए मिलता.
3.दुनिया की टॉप 5 स्पेस एजेंसियां

लेकिन पीएसएलवी-सी62 के ऊपरी चरण में आई टेक्निकल दिक्कत के कारण मिशन फेल हो गया. इससे न सिर्फ इसरो को बड़ा झटका लगा है, बल्कि भारत के खजाने को भी भारी नुकसान पहुंचा है. ISRO दुनिया की उन ताकतवर एजेंसियों में शामिल है. जिसने चंद्रयान समेत कई सफल मिशन किए हैं. चलिए जानते हैं टॉप 5 स्पेस एजेंसियों के बारे में.
4.नासा

अमेरिका का नासा (NASA) दुनिया की सबसे पावरफुल स्पेस एजेंसी है. यह 1958 में बनाई गई थी. NASA ने अपोलो मिशन से चांद पर इंसान को पहुंचाया. हबल टेलीस्कोप से ब्रह्मांड को समझने में मदद की. मंगल ग्रह पर भी कई उपलब्धि अपने नाम की. नासा का हर साल का बजट लगभग 25 अरब डॉलर का होता है, जिसे अमेरिकी सरकार आवंटित करती है.
5.यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA)

यह स्पेस एजेंसी 22 देशों के गठजोड़ से बनी है. ESA का गठन 1975 में हुआ था. तब से यह अंतरिक्ष में यूरोप की ताकत दिखा रही है. इस एजेंसी ने रोसेटा मिशन के तहत एक धूमकेतु पर लैंडर उतारकर इतिहास रचा था. इसी तरह गैलीलियो सैटेलाइट सिस्टम ने GPS का विकल्प दिया. यूरोपियन स्पेस एजेंसी के पास संसाधनों, वैज्ञानिक दिमागों और टेक्नोलॉजी का विशाल भंडार है.
6.सीएनएसए

1993 में बनी चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA) ने जिस तेजी से तरक्की की, उसने दुनिया को चौंका दिया. चीन की यह स्पेस एजेंसी हर गृह पर अपना झंड़ा गाड़ रही है. चांग'ई मिशन से सफलतापूर्वक चांद पर कदम रखा. तियानगोंग स्पेस स्टेशन और मंगल पर सफलतापूर्वक रोवर उतारे.
7.रोस्कोस्मोस

रूस की रोस्कोस्मोस (Roscosmos) स्पेस एजेंसी दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है, जिसने सोवियत संघ की अंतरिक्ष अन्वेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में तनाव के कारण रोस्कोस्मोस को लगभग 2.1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. जिससे उसके रिसर्च पर असर पड़ा है. रूस रोस्कोस्मोस के लिए हर साल लगभग 180 बिलियन रूबल (लगभग 2.1 बिलियन डॉलर) बजट खर्च करता है.
8.इसरो

दुनिया की टॉप 5 एजेंसियों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो का नाम भी शामिल है. जिसने मंगलयान, चंद्रयान सीरीज, और अन्य सफलता हासिल की हैं. इसरो के लिए इस बार सरकार ने लगभग 13,416 करोड़ रुपये बजट आवंटित किया था, जो पिछले साल के 13,042 करोड़ रुपये से अधिक है.