भारत
Pragya Bharti | Jul 17, 2026, 09:44 AM IST
1.Sonam Wangchuk Hunger Strike

सोनम वांगचुक का नाम आज एक ऐसे प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में लिया जाता है. उन्होंने लद्दाख के भूगोल के साथ-साथ वहां की शिक्षा प्रणाली को भी पूरी तरह से बदल दिया है. फिलहाल सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका समर्पण चर्चा का विषय बना हुआ है. तो इसी के साथ, आइए उस शख्सियत के बारे में जानते हैं, जिन्हें 2018 में एशिया के प्रतिष्ठित 'रैमन मैग्सेसे' पुरस्कार से नवाजा गया था, पर ये सम्मान वांगचुक को क्यों मिला था, आइए जानते हैं.
2.सोनम वांगचुक को क्यों मिला था रैमन मैग्सेसे पुरस्कार?

सोनम वांगचुक को 2018 में शिक्षा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए रैमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया था. फाउंडेशन ने उनके उस दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें उन्होंने विज्ञान और तकनीक का उपयोग हिमालयी क्षेत्रों की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए किया. वांगचुक ने साबित कर दिया कि कैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाए जा सकते हैं.
3.सोनम वांगचुक ने किन-किन चीजों की खोज की?

आइस स्तूप: लद्दाख में खेती के लिए पानी की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है. सर्दियों का पानी ग्लेशियर के पिघलने से व्यर्थ बह जाता था. इस समस्या के समाधान के लिए वांगचुक ने 'आइस स्तूप' तकनीक विकसित की. सर्दियों के पानी को पाइप के जरिए स्प्रे करके उन्होंने कोन के आकार की बर्फ की संरचनाएं बनाईं. यह बर्फ वसंत ऋतु में धीरे-धीरे पिघलती है, जिससे किसानों को मई-जून के समय सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता है.
4.पैसिव सोलर हीटेड मिट्टी की इमारतें

लद्दाख की कड़ाके की ठंड से बचने के लिए वांगचुक ने स्थानीय मिट्टी और पुआल का उपयोग कर पैसिव सोलर हीटेड इमारतें बनाईं. ये घर दिन के समय सूरज की रोशनी से गर्मी सोखते हैं और रात भर उसे अंदर बनाए रखते हैं. परिणाम यह है कि बाहर तापमान -15 डिग्री सेल्सियस से नीचे होने पर भी घर के अंदर का वातावरण आरामदायक बना रहता है.
5.भारतीय सेना के लिए सोलर हीटेड टेंट

साल 2021 में वांगचुक ने लद्दाख की कठिन ऊंचाइयों पर तैनात सैनिकों के लिए हल्के और पोर्टेबल सोलर हीटेड टेंट तैयार किए. ये टेंट दिन में सौर ऊर्जा को संग्रहित कर रात में गर्मी प्रदान करते हैं. इससे न केवल सैनिकों को अत्यधिक ठंड से सुरक्षा मिलती है, बल्कि ईंधन पर निर्भरता भी कम हो जाती है.
6.SECMOL: शिक्षा के नए नजरिए का स्थापना

1988 में सोनम वांगचुक ने 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की. यह संस्थान रटने के बजाय 'करके सीखने' (Learning by doing) के मॉडल पर आधारित है. यह उन छात्रों के लिए वरदान साबित हुआ जो पारंपरिक स्कूली परीक्षा प्रणाली में संघर्ष कर रहे थे.
7.ऑपरेशन न्यू होप और बदलाव की बयार

SECMOL के अलावा, 1994 में उन्होंने 'ऑपरेशन न्यू होप' की शुरुआत की. इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूरे लद्दाख के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार करना था. वांगचुक का मानना है कि सही शिक्षा और तकनीक का मेल ही समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान का एकमात्र मार्ग है. आज उनका जीवन हर उस व्यक्ति के लिए एक मिसाल है, जो अपने ज्ञान का उपयोग मानवता की सेवा में करना चाहता है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से