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सुमित तिवारी | Nov 18, 2025, 11:39 AM IST
1.चंबल

आपने चंबल का नाम तो सुना ही होगा. चंबल नदी किनारे का ये इलाका डाकुओं के लिए एकदम परफेक्ट हुआ करता था. एक समय में चंबल की घाटी को डाकुओं का गढ़ भी कहा जाता था.
2.पान सिंह तोमर और फूलन देवी

पान सिंह तोमर, फूलन देवी जैसे कुख्यात डाकू इसी चंबल के बीहड़ों में रहा करते थे. रामबाबू और दयाराम गड़रिया का गड़रिया गैंग ने 10 साल से भी ज्यादा बीहड़ में खौफ फैलाए रखा.
3.बलुई और रेतीली मिट्टी

बलुई और रेतीली मिट्टी के टीले और कंटीली झाड़ियों के जंगल में रास्ता भटकना बहुत आसान है, लेकिन डाकुओं के लिए नहीं. बीहड़ के कई खंदर और खोह बहुत ही दुर्गम हैं.
4.जानवरों का खतरा

यहां पर जहरीले सांपों, बिच्छुओं और अन्य जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए यहां पर पुलिस का पहुंचना संभव नहीं है और अगर पुलिस पहुंच भी जाती थी तो डाकुओं को ठिकाना पता लगाना असंभव था.
5.पुलिस के लिए भूलभुलैया

एक तरफ जहां आम आदमी और पुलिस के लिए ये बीहड़ भूलभुलैया थे, तो वहीं डाकुओं के लिए ये मोहल्ले की गलियों के समान थे. इसलिए पता ही नहीं चलता था कि कब किस तरफ से डाकू हमला कर दें.