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Nitin Sharma | Jul 18, 2025, 07:04 PM IST
1.हेल्दी डॉग्स ब्लड डोनेट

इसमें कुत्ते जख्मी और घायल भी हो जाते हैं. इसमें कई बार कुत्तों को खून की जरूरत भी पड़ती है. उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए ही सेना के हेल्दी डॉग्स ब्लड डोनेट करते हैं. आइए जानते हैं कि कब और कैसे ब्लड डोनेट करते हैं.
2.चोट लगने पर होती है खून की जरूरत

दरअसल सेना के अंदर कुत्ते सेना के साथ एक अहम भूमिका निभाते हैं. इनमें मिलिट्री डॉग्स यूनिट का नाम रीमाउंट वेटनरी कॉर्प्स है. ये कुत्ते बम डिफ्यूज से लेकर स्पेशल टास्क, खूफियां जांच और युद्ध के मैदान में अहम भूमिका निभाते हैं. इस दौरान कुत्ते घायल हो जाते हैं. तब उन्हें खून की जरूरत होती है. तब हेल्दी कुत्तों से लेकर घायल कुत्तों को खून चढ़ाकर उनकी जान बचाई जाती है. वहीं ऐसी विषम परिस्थितियों के लिए ही सेना के डॉग यूनिट में मौजूद कुत्तों से खून लिया जाता है.
3.हेल्दी डॉग्स से कराया जाता है ब्लड डोनेट

जिस तरह से हेल्दी लोगों से ब्लड डोनेट कराकर रखा जाता है. ठीक वैसे ही डॉग यूनिट में मौजूद हेल्दी डॉग्स का ब्लड डोनेट कराया जाता है. इसे रखा जाता है और जब भी किसी घायल चोटिल कुत्तों को इसकी जरूरत होती है. तब उसे यह खून चढ़ाया जाता है. कई बार जरूरत पड़ने पर आर्मी डॉग्स का यह खून आम और पालतू कुत्तों को चढ़ाया जाता है.
4.28 दिनों तक सही रह सकता है कुत्ते का खून

Health.mil की मानें तो कुत्तों का खून ज्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता है. इसकी वैद्यता यानी सही रहने का समय 28 दिन है. इसके बाद यह खराब होने लगता है. कुत्तों को डोनेट किया खून बहुत लंबे समय तक स्थिर नहीं रह पाता है. इसे 4 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है. इसमें भी यह 28 दिनों तक सही रहता है. इसके बाद यह खराब हो जाता है. हालांकि इसके फ्रोजन प्लाज्मा एक साल तक इस्तेमाल किये जा सकते हैं.
5.ब्लड डोनेट का कुत्तों पर होता है ऐसा असर

किसी भी जीव का खून लेने पर उस पर प्रभाव पड़ता है. डीएचए की मानें को जो कुत्ते खून देते हैं यानी डोनर होते हैं, वे खून देने के 24 घंटे तक काम नहीं कर पाते हैं. इसके अलावा ये सिर्फ 2 महीने में 1 बार ब्लड डोनेट कर पाते हैं.
6.रतन टाटा ने की थी कुत्ते के लिए ब्लड डोनेट की अपील

वैसे ज्यादातर समय सेना के कुत्तों को खून की जरूरत पड़ती है. उन्हीं के हेल्दी कुत्ते खून डोनेट भी करते हैं, लेकिन इसमें कई बार ऐसा भी होता है, जब इनका खून घायल आम या पालतू कुत्ते को दिया जाता है. एक बार रतन टाटा ने भी एक पालतू कुत्ते को खून उेने की अपील की थी. इसमें उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट कर लिखा था कि ब्लड डोनेट करने वाले कुत्ते की उम्र 1 से 8 साल के बीच होनी चाहिए. वहीं उसका वजन कम से कम 25 किलो और पूरा टीकाकृत होना चाहिए. तभी ब्लड ले सकते हैं. इसके बाद बहुत से लोग अपने कुत्तों का ब्लड डोनेट कराने के लिए सामने आए थे. इसी के बाद से टाटा ट्रस्ट के स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल में कुत्तों व अन्य पालतू पशुओं के लिए ब्लड डोनेट और ब्लड चढ़ाने की सुविधा भी शुरू की गई.