भारत
Shivendra Rai | Jun 04, 2026, 06:03 PM IST
1.'रुद्रम' का सफल परीक्षण

भारत ने हाल ही में एक ऐसी मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जो दुश्मन के रडार को तबाह करने के लिए डिजाइन की गई है. 'रुद्रम' एक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है जिसके कई वैरियंट विकसित किए जा रहे हैं. ये मिसाइल ब्रह्मोस या अस्त्र जैसे हथियारों से बिल्कुल अलग है. आइये जानते हैं कि एंटी-रेडिएशन मिसाइल होती क्या है और इसका इस्तेमाल कब और क्यों किया जाता है.
2.एंटी-रेडिएशन मिसाइल का काम

किसी युद्ध या मिशन के समय वायुसेनाएं सबसे पहले दुश्मन की रक्षात्मक क्षमता को खत्म करती हैं. इसके लिए जरूरी है कि दुश्मन के रडार ठिकानों पर हमला करके उसके एयर डिफेंस नेटवर्क को बर्बाद कर दिया जाए. इस काम के लिए पारंपरिक हमलावर मिसाइलें नहीं बल्कि एंटी-रेडिएशन मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है. 'रुद्रम' इसी तरह की मिसाइल है.
3.कैसे काम करती है एंटी-रेडिएशन मिसाइल?

एस-400 या एचक्यू-9 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम खतरों की निगरानी के लिए शक्तिशाली रडार का इस्तेमाल करते हैं. एंटी-रेडिएशन मिसाइलें इन रडार से निकलने वाली किरणों को डिटेक्ट कर लेती हैं और पूरे सिस्टम को तबाह करने के लिए आगे बढ़ती हैं. पारंपरिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में एंटी-रेडिएशन मिसाइलें बेहद सटीक और तेज होती हैं.
4.कितनी खतरनाक है RudraM-II?

एंटी-रेडिएशन मिसाइलों से बचने के लिए सेनाएं 'गोइंग डार्क' रणनीति का इस्तेमाल करती हैं. इसमें एक बार रडार ऑन करने और एरिया स्कैन करने के बाद इसे बंद कर दिया जाता है. इस दौरान अगर कोई मिसाइल दुश्मन दागता भी है तो यह रडार सिग्नल बंद होने से बीच में रास्ता भटक जाती है. लेकिन, RudraM-II के पास इस तकनीक की भी काट है.
5.हर हाल में दुश्मन का रडार फोड़ देगी RudraM

RudraM-II एंटी-रेडिएशन मिसाइल दुश्मन के रडार सिस्टम को तब भी नष्ट कर सकती है जब यह अचानक ट्रांसमिट करना बंद कर दें. RudraM-II को एक बार रडार की रेडियो तरंगों पर लॉक कर दिया गया तो फिर यह किसी भी दशा में उसके स्रोत तक पहुंच जाती है.
6.पाकिस्तान के डिफेंस नेटवर्क का काल

पाकिस्तान चीन से खरीदे गए एच क्यू 9 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हवाई खतरों से निपटने के लिए करता है. लेकिन यह उतना शक्तिशाली नहीं है जितना की भारत का एस-400. चीनी एच क्यू 9 या एच क्यू 9 बी जैसे सिस्टम RudraM फैमिली की मिसाइलों से बच नहीं सकते. खासतौर से सीमावर्ती इलाकों में तैनात सिस्टम तो पूरी तरह से इस मिसाइल की जद में होंगे.
7.RudraM-II की स्पीड और रेंज

जब RudraM-II को 300 से 350 किलोमीटर की दूरी से लॉन्च किया जाता है, तो यह मिसाइल दुश्मन के रडार सिग्नलों का पता लगाती है और उनकी खास फ़्रीक्वेंसी प्रोफाइल पर लॉक हो जाती है. अपनी उड़ान के आखिरी पलों में RudraM-II एक इमेजिंग इंफ़्रारेड (IIR) सीकर को भी सक्रिय कर देती है. ये ऐसी खासियत है जिससे लोकेशन चेंज कर रहा सिस्टम भी बच नहीं पाता. यही नहीं RudraM-II 5.5 मैक की हाइपरसोनिक स्पीड से हमला कर सकती है. दागने के बाद यह कुछ ही सेकेंड में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है. (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं और AI की मदद से बनाई गई हैं.)