भारत
राजा राम | Jul 15, 2025, 10:23 PM IST
1.कई पहलुओं में अंतर देखने को मिलता है.

भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को 18 दिवसीय ऐतिहासिक मिशन के बाद समुद्र में ‘स्प्लैशडाउन’ के साथ सफल लैंडिंग की. यह पहला मौका है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री समुद्र पर उतरा है. दूसरी और, 41 साल पहले, 1984 में राकेश शर्मा ने सोयूज यान से कजाखस्तान के सैनेट मैदान में जमीन पर लैंडिंग की थी. इन दोनों लैंडिंग तकनीकों में सुरक्षा, रिकवरी प्रक्रिया और मिशन लागत जैसे कई पहलुओं में अंतर देखने को मिलता है.
2.शुभांशु शुक्ला की सफल वापसी

Axiom‑4 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल ‘Grace’ में समुद्र में कैलिफोर्निया तट पर सुरक्षित स्प्लैशडाउन किया.
3.स्प्लैशडाउन की विशेषताएं

पानी की नरम सतह झटके को कम करती है, खासकर थके हुए शरीर को राहत देती है. इस प्रक्रिया में पैराशूट द्वारा धीमा किया गया कैप्सूल नीले जल में सुरक्षित तरीके से उतरता है, जिसके बाद रिकवरी टीम तुरंत मदद करती है.
4.ग्राउंड लैंडिंग

अप्रैल 1984 में, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा सोयूज़ T‑10 के साथ कजाखस्तान में जमीन पर उतरे थे. जमीन लैंडिंग में पैराशूट खुलते समय तेज आवाज और झटके अधिक होते हैं, जिससे शरीर पर भारी असर होता है.
5.रिकवरी और ऑपरेशनल पहलू

जमीन लैंडिंग में सटीक भूमि चुनने की चुनौतियान होती हैं. वहीं समुद्र में स्प्लैशडाउन से आबादी, संपत्ति नुकसान और मलबा खतरा कम हो जाता है. हालांकि समुद्र में उतरने के बाद रिकवरी संचालन और टीमों की तैनाती की जरूरत होती है, लेकिन आधुनिक कैप्सूल और पोत इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं.
6.भविष्य के लिए संकेत

शुभांशु शुक्ला अब सात दिन की पुनर्वास अवधि से गुजरेंगे, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति, हार्ट रेट और संतुलन की समीक्षा होगी. साथ ही यह अनुभव भारत के गगनयान मिशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा. समुद्र में स्प्लैशडाउन और जमीन पर पैराशूट लैंडिंग के अपने-अपने फायदे और चुनौतियां हैं. शुभांशु और राकेश के अनुभव हमें यह समझने में मदद करते हैं कि आगे के मिशनों में किन तकनीकों का चयन करना बेहतर रहेगा.