भारत
Gaurav Barar | Apr 22, 2026, 10:32 AM IST
1.ट्रॉल सिस्टम की खरीद को हरी झंडी

भारतीय सेना को और भी घातक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हमारे मुख्य युद्धक टैंकों, T-72 (अजेय) और T-90 (भीष्म) के लिए स्वदेशी 'ट्रॉल सिस्टम' की खरीद को हरी झंडी दे दी है.
2.किसी और का मुंह ताकने की जरूरत नहीं

लगभग 975 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट ने यह साफ कर दिया है कि अब भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी और का मुंह नहीं ताकेगा. यह डील सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BEML और एक निजी कंपनी के साथ मिलकर की गई है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह से भारत में बनी है और इसे DRDO के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है.
3.क्या होता है ट्रॉल सिस्टम?

इसे बहुत आसान भाषा में समझें तो यह टैंक के लिए एक रास्ता बनाने वाली मशीन की तरह है. युद्ध के मैदान में दुश्मन अक्सर हमारे टैंकों को रोकने के लिए जमीन के नीचे बारूदी सुरंगें बिछा देते हैं. अगर टैंक इनके ऊपर से गुजरता है, तो भारी नुकसान हो सकता है.
4.बारूदी सुरंगों को कर देगा तबाह

ट्रॉल सिस्टम लोहे का एक बेहद मजबूत और भारी ढांचा होता है, जिसे टैंक के अगले हिस्से में लगाया जाता है. जब टैंक आगे बढ़ता है, तो यह सिस्टम जमीन के अंदर दबी सुरंगों को या तो धमाका करके नष्ट कर देता है या उन्हें उखाड़कर एक तरफ फेंक देता है. इससे टैंक के पीछे आ रहे अन्य वाहनों और सैनिकों के लिए एक सुरक्षित रास्ता बन जाता है.
5.T-72 और T-90 टैंक अब होंगे और भी बेखौफ

भारतीय सेना के पास T-72 और T-90 जैसे दुनिया के बेहतरीन टैंक हैं, लेकिन बारूदी सुरंगों वाले इलाकों में इन्हें ले जाना हमेशा एक चुनौती रहा है. अब इन स्वदेशी ट्रॉल के लगने से ये टैंक किसी भी दुर्गम इलाके में बेखौफ होकर घुस सकेंगे.
6.कम नहीं होने देगा टैंक की रफ्तार

DRDO द्वारा विकसित यह स्वदेशी सिस्टम इतना एडवांस है कि यह टैंक की रफ्तार को कम नहीं होने देता. चाहे रास्ता पथरीला हो या रेतीला, यह सिस्टम हर जगह काम करता है. अब भीष्म और अजेय टैंक दुश्मन के इलाके में बिजली की गति से हमला करने के लिए तैयार हैं.
7.आत्मनिर्भरता की एक बड़ी छलांग

पहले भारत को इस तरह की तकनीक के लिए रूस या यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता था. इसके लिए न केवल करोड़ों डॉलर खर्च होते थे, बल्कि युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में स्पेयर पार्ट्स के लिए भी दूसरे देशों का इंतजार करना पड़ता था.
8.विदेशी मुद्रा की बचत समेत कई फायदे

अब बीईएमएल जैसी कंपनियां इसे देश में बना रही हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, देश का पैसा देश के काम आएगा. डिफेंस सेक्टर से जुड़े हजारों लोगों और MSME को काम मिलेगा. भारत भविष्य में इस तकनीक को अन्य मित्र देशों को बेच भी सकता है.
9.युद्ध के मैदान में पासा पलटने वाली तकनीक

युद्ध में जीत अक्सर इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी तेजी से हमला करते हैं. अगर रास्ते में बारूदी सुरंगें हों, तो सेना की रफ्तार धीमी हो जाती है और दुश्मन को संभलने का मौका मिल जाता है. यह नया ट्रॉल सिस्टम इसी देरी को खत्म कर देगा.
10.हर मौसम में करेगा काम

सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिस्टम रात के अंधेरे और बेहद खराब मौसम में भी सटीक काम करता है. इससे न केवल हमारे महंगे टैंक सुरक्षित रहेंगे, बल्कि उन जांबाज सैनिकों की जान भी बचेगी जो इन मशीनों को चलाते हैं. अब भारतीय टैंक दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए कवच पहनकर तैयार हैं.