भारत
राजा राम | Feb 12, 2026, 05:48 PM IST
1.करप्शन परसेप्शन इंडेक्स तस्वीर साफ कर दी

दुनिया भर में भ्रष्टाचार को लेकर जारी ताजा करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) ने कई देशों की तस्वीर साफ कर दी है. सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जारी रिपोर्ट ने यह दिखाया है कि किन देशों ने सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए और किन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है. इस रिपोर्ट को नीति निर्धारण और शासन की गुणवत्ता के पैमाने पर काफी अहम माना जाता है.
2.भ्रष्टाचार अब भी गंभीर चुनौती

वैश्विक स्तर पर औसत स्कोर में गिरावट दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक दो-तिहाई देशों का स्कोर 50 से नीचे है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में पारदर्शिता की स्थिति संतोषजनक नहीं है.
3.भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज

कई देशों में जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रही है और सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रही है.रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. 2012 से अब तक गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है.
4.किस देश ने किया टॉप

डेनमार्क 89 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर है, जबकि फिनलैंड और सिंगापुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. दूसरी ओर, दक्षिण सूडान और सोमालिया सबसे निचले पायदान पर हैं. अमेरिका को 29वां और ब्रिटेन को 20वां स्थान मिला है.
5.भारत के लिए राहत भरी खबर

इसी बीच भारत के लिए इस बार की रिपोर्ट राहत भरी खबर लेकर आई है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) 2025 में भारत ने अपनी स्थिति में सुधार दर्ज किया है. यह सुधार सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
6.भारत ने पांच स्थानों की बढ़त हासिल की

ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पांच स्थानों की बढ़त हासिल की है. पहले जहां भारत 96वें स्थान पर था, अब वह सुधरकर 182 देशों में 91वें पायदान पर पहुंच गया है. यह रैंकिंग भारत के लिए एक उल्लेखनीय प्रगति के रूप में देखी जा रही है.
7.चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं

हालांकि सुधार के बावजूद चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. रिपोर्ट बताती है कि 31 देशों ने इस वर्ष सुधार किया है, जबकि कई देश अब भी पिछड़ रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए यह सुधार उत्साहजनक जरूर है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक है.
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