भारत
Gaurav Barar | May 11, 2026, 12:13 PM IST
1.प्रधानमंत्री की देशवासियों से अपील

वर्तमान में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पैदा हुई वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं. इन परिस्थितियों को भांपते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ज्यादा जिम्मेदारी और संयम के साथ खर्च करने की एक महत्वपूर्ण अपील की है.
2.एक साल सोने की खरीदारी से बचें

पीएम मोदी ने लोगों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अगले कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें. इसके अतिरिक्त, उन्होंने अनावश्यक व्यक्तिगत खर्चों में कटौती करने और कॉर्पोरेट जगत को जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को अपनाने की सलाह दी है.
3.अपील के पीछे का आर्थिक गणित

माना जा रहा है कि सरकार इस कदम के जरिए भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना चाहती है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना और कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इन पर होने वाला खर्च सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे को बढ़ाता है.
4.सोना खरीदने से क्या असर होता है?

वैश्विक तनाव के समय कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हो जाती हैं, जिससे आयात बिल बढ़ जाता है. ऐसे में, यदि सोने का आयात भी उच्च स्तर पर बना रहता है, तो यह देश की आर्थिक सेहत के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है. सरकार की कोशिश आयात खर्च को नियंत्रित कर मुद्रास्फीति और व्यापार संतुलन को साधने की है.
5.भारत में सोने का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों की सूची में शीर्ष पर है. यहां सोने का महत्व केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, यह भारतीय परिवारों के लिए एक सुरक्षित निवेश, सामाजिक प्रतिष्ठा और वित्तीय सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद प्रतीक माना जाता है. शादी-विवाह, प्रमुख त्योहारों और अन्य पारंपरिक अवसरों पर सोना खरीदना भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अटूट हिस्सा बन चुका है.
6.भारतीयों के पास कितना सोना?

विभिन्न रिपोर्ट्स, जिनमें मार्गन स्टैनल और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े शामिल हैं, एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर करती हैं. इनके अनुसार, भारतीय परिवारों के पास कुल मिलाकर करीब 34,600 टन सोना जमा है. यह मात्रा दुनिया के सभी केंद्रीय बैंकों, जैसे- यूएस फेडरल रिजर्व, के कुल स्वर्ण भंडार से भी कहीं अधिक है. यह वैश्विक स्तर पर मौजूद कुल सोने के भंडार का लगभग 11% से 13% हिस्सा है.
7.भारत की वर्तमान जीडीपी से भी ज्यादा कीमत

पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में हुई रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी के कारण इस घरेलू भंडार की कुल वैल्यू लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर (5000 अरब डॉलर) तक पहुंच गई है. भारतीय मुद्रा में यह रकम 450 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है. सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय घरों में जमा सोने की यह कुल संपत्ति अब भारत की वर्तमान जीडीपी, जो लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर है, उससे भी अधिक हो चुकी है.
8.आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव

जैसा कि पहले जिक्र किया गया है, भारत सोने की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. जब वैश्विक परिदृश्य तनावपूर्ण होता है और डॉलर मजबूत होता है, तब सोने का आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से सोखता है. प्रधानमंत्री की चिंता यह है कि यदि इस संकट के समय भी लोग बड़े पैमाने पर सोना खरीदते रहे, तो देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार कम हो सकता है, जिसकी जरूरत अन्य आवश्यक वस्तुओं (जैसे दवाएं, रक्षा उपकरण) के आयात के लिए हो सकती है.
9.वर्क फ्रॉम होम को वापस लाएं

ऐसे में उन्होंने लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी खरीदारी टालने और देशहित में आर्थिक संयम बरतने की अपील की है. साथ ही, उन्होंने ऊर्जा बचत और जिम्मेदार उपभोग की दिशा में कदम बढ़ाने की बात भी कही है. आर्थिक दबाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि कंपनियों से भी सहयोग मांगा है. उन्होंने कॉर्पोरेट्स से अपील की है कि वे कोविड-19 काल की तरह, जहां भी संभव हो, वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को बढ़ावा दें.
10.ईंधन की बचत करें

पीएम का मानना है कि इस कदम से न केवल कर्मचारियों का आवागमन कम होगा, बल्कि ईंधन की भी भारी बचत होगी. चूंकि भारत ईंधन के लिए भी आयात पर निर्भर है, इसलिए ईंधन की खपत में कमी सीधे तौर पर आयात बिल को कम करेगी और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगी.