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ज्योति वर्मा | Jun 20, 2025, 01:27 PM IST
1.Bajau tribe

बजाऊ जनजाति इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस के समुद्री इलाकों में निवास करती है और ये समुद्र के इर्द गिर्द घूमती एक अनोखी लाइफस्टाइल को फॉलो करते हैं. रिसर्च के मुताबिक बाजाऊ की स्पिलिन, औसतन, सामान्य आबादी की तुलना में 50 प्रतिशत बड़ी होती है. यह एक अनुकूल है, जो उन्हें लंबे तक जीने और पानी की गहराई तक गोता लगाने में मदद करता है.
2.बजाऊ जनजाति के लोग 10 मिनट से ज्यादा पानी में रोक सकते हैं सांस

बाजाऊ जनजाति अपने शानदार फ्री डाइविंग स्किल्स के लिए जाने जाते हैं, जो कि मॉर्डन सामानों की मदद के बिना 20 से 30 मीटर की गहराई तक गोता लगाने में माहिर होते हैं और ये 5 से 13 मिनट तक अपनी सांस रोक कर रखते हैं. इस अनुकूलन(एडेप्टेशन) को PDE10A जीन में बदलाव से जोड़ा गया है, जो जनजाति के जलीय जीवन शैली के लिए एक अलग लाइफ स्टाइल को दिखाता है.
3.बाजाऊ जनजाति के बच्चे बचपन से ही सीख लेते हैं गोताखोरी

बाजाऊ के बच्चे छोटी उम्र से ही तैराकी और गोताखोरी की कला सीख लेते हैं, क्योंकि समुद्र के किनारे ही उनका जीवन बीतता है और वे वही लाइफस्टाइल जीते हैं. समुद्र के पास रहकर और वहां गोताखोरी से उन्हें कई संसाधन मिलते हैं. जैसे कि मछलियां, ऑक्टोपस और समुद्री खीरे भी. जिनका शिकार वे हाथ से बने भालों से करते हैं.
4.मछली पकड़ना है बाजाऊ जनजाति का अहम हिस्सा

यह जनजाति लेपा लेपा नामक लकड़ी की नावों में रहती हैं, जो उनके घर और ट्रेवल के तौर पर काम करती है. वे द्वीप के बीच आवाजाही करते है. यह जनजाति पूरी तरह से समुद्र पर निर्भर रहती है. मछली पकड़ना बाजाऊ लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा है. यह एक ऐसी प्रथा है जो उनके अस्तित्व को बनाए रखती है और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है.
5.बाजाऊ जनजाति के कुछ लोग अब रहते हैं तटीय घरों में

मछली पकड़ने के जरिए बाजाऊ के लोग अपनी पैतृक परंपराओं को संरक्षित रखते हैं. साथ ही अपने समुदाय के अंदर मजबूत सामाजिक रिश्तों को भी बढ़ावा देते हैं. हालांकि अब कुछ बाजाऊ तटीय स्टिल्ट घरों में रहने लगे हैं, लेकिन समुद्र के साथ उनका संबंध अभी भी मजबूती से बना हुआ है. लेकिन उनकी लाइफस्टाइल को बढ़ते टूरिज्म से खतरा है, जो मछली पकड़ने के रास्ते में मुश्किल खड़ी करता है. डायनामाइट मछली पकड़ने जैसी विनाशकारी प्रथाएं पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाती हैं.
6.बाजाऊ जनजाति के लोग हैं इन सुविधाओं से वंक्षित

इन चुनौतियों पर काबू पाने के लिए, बाजाऊ के नेता भी अपने अधिकारों और लोगों की सुविधाओं के लिए काम कर रहे हैं. बता दें कि बहुत से बाजाऊ अब बेघर हैं और उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसी बेसिक सुविधाएं तक नहीं पहुंचती हैं. सरकार उन्हें स्थायी रूप से बसाने की कोशिश कर रही है और उनकी खानाबदोश लाइफस्टाइल और पहचान को खतरे में डाल रही है.