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Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को NCLAT से बड़ी राहत, IBDL की अपील खारिज, समझें क्या था मामला

राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिरण (NCLAT) से जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) को बड़ी राहत मिली है. एनसीएलएटी ने आईडीबीआई बैंक की उस याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया.

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Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को NCLAT से बड़ी राहत, IBDL की अपील खारिज, समझें क्या था मामला
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Zee Enterprises latest news: राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिरण (NCLAT) से जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) को बड़ी राहत मिली है.  एनसीएलएटी ने आईडीबीआई बैंक की उस याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया जिसमें जी एंटरटेनमेंट के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया था.

अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कहा कि IDBI Bank द्वारा दायर की गई याचिका कोविड-19 के संरक्षित अवधि में हुई चूक के चलते दायर की गई थी, इसलिए इसे खारिज किया जाता है. 

IDBI का आरोप क्या था?

IDBI बैंक ने जी मीडिया एंटरटेनमेंट लिमिटेड के खिलाफ दिवाला याचिका दायर कर मांग की थी कि जी एंटरटेनटमेंट लिमिटेड ने सीटीआई नेटवर्क्स लिमिटेड को दी गई वर्किंग कैपिटल सुविधाओं के लिए ऋण सेवा आरक्षित खाते (DSRA) के रखरखाव की गारंटी का उल्लंघन किया है और 61.97 करोड़ रुपये का भुगतान करने में असफल रहा है. 

NCLAT ने क्या कहा?

एनसीएलट ने आईडीबीआई बैंक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि कथित चूक आईबीसी की घारा 10ए के तहत संरक्षित अवधि के अंतर्गत आती थी. एनसीएलटी ने पाया एनसीएलटी ने पाया कि ZEEL की देयता केवल मूल 50 करोड़ रुपये की सुविधा पर दो तिमाहियों के ब्याज के रखरखाव तक सीमित थी, न कि पूरी बकाया राशि तक. इसके अलावा, मांग नोटिस मार्च 2021 में जारी किया गया था, जो कोविड-19 के कारण दिवाला प्रक्रिया पर लगाई गई रोक के दौरान था. हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि आईडीबीआई बैंक आईबीसी की धारा 10ए में निर्धारित अवधि से परे चूकों के लिए एक नई दिवाला याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र है.

मामला कहां से शुरू हुआ?

अगस्त 2012 में यह विवाद एक गारंटी समझौते से शुरू हुआ था, जिसके तहत, ZEEL ने आईडीबीआई बैंक द्वारा सिटी नेटवर्क्स लिमिटेड को दी गई कार्यशील पूंजी सुविधाओं के लिए ऋण सेवा रिजर्व खाता (DSRA) बनाए रखने की गारंटी दी थी. पर इसी बीच मुख्य उधारकर्ता का खाता दिसंबर 2019 में एनपीए बन गया था. इस पर ZEEL ने तर्क दिया कि उसकी जिम्मेदारी केवल मूल 50 करोड़ रुपये की सुविधा पर  ब्याज भुगतान तक सीमित थी और यह बढ़ी हुई सीमाओं या मूलधन राशियों पर लागू नहीं होती.  कंपनी ने यह भी कहा कि फरवरी 2021 में पूरी सुविधा को वापस ले लिया गया था, जिससे किसी भी चल रही DSRA रखरखाव की जिम्मेदारी समाप्त हो गईं. बाद में आईडीबीआई बैंक ने बाद में ZEEL के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में याचिका दायर की.


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कंपनी ने कहा कि फरवरी 2021 में पूरी क्रेडिट फैसिलिटी वापस ले ली गई थी, इसलिए DSRA की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है. विवाद बढ़ा तो मामला एनसीएलसी और फिर NCLAT पहुंचने लगा. बैंक को पहले एनसीएलटी में झटका मिला, जिसके बाद उसने एनसीएलएटी में अपील की. अब वहां से भी उसे झटका मिला है और याचिका खारिज कर दी गई है.  

 

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