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बेंगलुरु से एक बार फिर तीन तलाक की खबर सामने आई है. कथित तौर पर पति ने पत्नी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया इसके साथ ही उसे तीन तलाक दे दिया.
बेंगलुरु से एक चौंकाने वाली खाबर सामने आ रही है. यहां एक महिला ने बेंगलुरु के बनशंकरी पुलिस स्टेशन में अपने पति यूनुस पाशा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने अपने पति पर दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और एक बार में तीन तलाक देने का आरोप लगाया है. एक ऐसी प्रथा जो भारत में पहले से ही प्रतिबंधित है. पीड़ित हलीमा सादिया ने आरोप लगाया कि उसे अपने पति के "मनोरोगी व्यवहार" को सहने के लिए मजबूर किया गया और लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बाद उसे पुलिस से संपर्क करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
शिकायत के अनुसार, यूनुस पाशा ने कथित तौर पर हलीमा को राजनेताओं सहित प्रभावशाली लोगों के साथ सोने के लिए कहकर वेश्यावृत्ति में धकेलने की कोशिश की. जब उसने इनकार कर दिया, तो उसने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की और उसे छह अलग-अलग मौकों पर तीन तलाक दे दिया. महिला ने पति पर उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया है. हलीमा ने एक भयावह आरोप में कहा कि उसके पति ने एक बार उसे धमकाने के लिए उसके सिर पर बंदूक तान दी थी और नियमित रूप से उसके परिवार के सदस्यों को छुरे और लंबे चाकू दिखाकर धमकाता था.
महिला ने बताया कि उत्पीड़न उसके पति तक ही सीमित नहीं रहा था. हलीमा ने अपने ससुर और सास पर भी बार-बार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. उसने दावा किया कि उसके ससुर उससे रोजाना बॉडी मसाज की मांग करते थे और यहां तक कि पारिवारिक दायित्वों के बहाने उस पर दबाव भी डालते थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके ससुराल वाले दहेज की मांग करते थे और लगातार उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे.
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पुलिस को दी गई अपनी याचिका में हलीमा ने दावा किया कि उसका पति नियमित रूप से दूसरी महिलाओं के साथ संबंध बनाता था और उसे दूसरे पुरुषों के साथ सोने के लिए मजबूर करता था. उसने आगे कहा कि जब उसने मदद मांगी, तो यूनुस ने अहंकार से कहा कि कांग्रेस सरकार उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगी. बनशंकरी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और गंभीर आरोपों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। महिला और उसके पिता न्याय और सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं. यह घटना एक बार फिर तत्काल तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के कार्यान्वयन और प्रवर्तन तथा वैवाहिक और पारिवारिक संबंधों की आड़ में महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार के व्यापक मुद्दे के बारे में चिंताएं उठाती है.
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