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तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान को कई दिनों तक फरार रहने के बाद एसटीएफ ने नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर आ रही है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता जहांगीर खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी कोई आम पुलिसिया कार्रवाई नहीं है, बल्कि बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े ऑपरेशन के बाद उन्हें धर दबोचा है. जहांगीर खान पिछले कई दिनों से फरार चल थे और पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई थी.
खबरों के मुताबिक, जहांगीर खान पर पुलिस का शिकंजा जैसे ही कसा, वह बंगाल से रफूचक्कर हो गए. पुलिस से बचने के लिए वह भारत छोड़कर नेपाल भागने की प्लानिंग कर रहे थे. सोमवार (8 जून 2026) सुबह-सुबह एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली कि जहांगीर नेपाल बॉर्डर के पास छिपे हुए हैं और सीमा पार करने की ताक में हैं. बिना वक्त गंवाए, एसटीएफ की एक स्पेशल टीम ने बॉर्डर के पास जाल बिछाया और सुबह-तड़के एक बड़े ऑपरेशन में उन्हें चारों तरफ से घेरकर कस्टडी में ले लिया.
अब सवाल उठता है कि आखिर जहांगीर खान ने ऐसा क्या किया कि उन्हें इस तरह भागना पड़ा? दरअसल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता थाने में जहांगीर खान के खिलाफ एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 7 एफआईआर दर्ज हैं. उन पर फलता उपचुनाव और स्थानीय पंचायत चुनावों के दौरान हिंसा भड़काने, गुंडागर्दी करने और लोगों को डराने-धमकाने के गंभीर आरोप हैं. पुलिस काफी समय से इन मामलों की जांच कर रही है. जब पुलिस ने उन पर दबाव बनाया, तो वह अंडरग्राउंड हो गए थे.
जहांगीर खान पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं. टीएमसी आलाकमान ने उन पर इतना भरोसा जताया था कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें फलता निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था. दक्षिण 24 परगना इलाके में उनका अच्छा-खासा राजनीतिक दबदबा माना जाता है. ऐसे में चुनाव लड़ चुके एक बड़े नेता का इस तरह आपराधिक मामलों में फंसना और नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार होना, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
एसटीएफ ने जहांगीर खान को गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उनकी रिमांड मांगेगी ताकि फलता थाने में दर्ज सातों मामलों को लेकर उनसे सख्ती से पूछताछ की जा सके. इस गिरफ्तारी के बाद बंगाल की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दल एक बार फिर सत्ताधारी टीएमसी पर हमलावर हो गए हैं.