Advertisement

ईरान से लेकर अरब तक ब्रिक्स के सदस्य... तो पाकिस्तान की क्यों नहीं हो पा रही BRICS में एंट्री? जानें किन देशों का इसमें दबदबा

BRICS 2026: ब्रिक्स समिट का आयोजन भारत में 12-13 सितंबर को किया जा रहा है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पुतिन सहित 11 देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं. पाकिस्तान अभी तक ब्रिक्स में नहीं शामिल हो पाया है. आइए जानते हैं कि इसका कारण क्या है?

Latest News
ईरान से लेकर अरब तक ब्रिक्स के सदस्य... तो पाकिस्तान की क्यों नहीं हो पा रही BRICS में एंट्री? जानें किन देशों का इसमें दबदबा

पाकिस्तान अभी ब्रिक्स का सदस्य नहीं है (इमेज क्रेडिट - AI)
 

Add DNA as a Preferred Source
  • भारत में 18वें ब्रिक्स समिट का आयोजन हो रहा है 
  • 11 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने भारत पहुंच गए हैं
  • समिट 12 और 13 सितंबर तक दो दिन चलेगी 
  • पाकिस्तान ब्रिक्स के सदस्य देशों से बाहर है

BRICS 2026: भारत 18वें ब्रिक्स समिट का आयोजन कर रहा है. समिट में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं. समिट का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 तक किया जाएगा. 11 देशों के प्रतिनिधियों का जमावड़ा दिल्ली में लगा है. पूरी दुनिया की नजर भारत में आयोजित हो रहे ब्रिक्स समिट पर है. ईरान और सउदी अरब भी ब्रिक्स के सदस्य हैं, लेकिन पाकिस्तान विश्व के इस बड़े मंच से अलग- थलग है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पाकिस्तान की ब्रिक्स में एंट्री क्यों नहीं हो पा रही है? जबकि चीन ने कई बार उसका समर्थन भी किया  

ब्रिक्स में कितने सदस्य देश हैं?

ब्रिक्स में कुल 11 देश शामिल हैं. इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल है. पाकिस्तान इसका सदस्य अभी तक नहीं बन गया है. वहीं बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पार्टनर देशों के रूप में ब्रिक्स में शामिल हैं. 

ब्रिक्स में किन देशों का है दबदबा?

ब्रिक्स में आर्थिक और रणनीतिक तौर पर चीन का सबसे बड़ा दबदबा है. आर्थिक आकार, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक व्यापार में सबसे आगे होने के कारण इस समूह में चीन का प्रभाव सबसे ज्यादा है. इसके बाद रूस और भारत का भी इसमें महत्वपूर्ण प्रभाव है. भारत, चीन, रूस और ब्राजील इसके संस्थापक सदस्य हैं और इन देशों का प्रभाव इसमें अधिक है. 

पाकिस्तान की क्यों नहीं हो पा रही एंट्री?

पाकिस्तान ने साल 2023 में ब्रिक्स की सदस्यता के लिए औपचारिक तौर पर आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसकी एंट्री नहीं हो पाई है. भारत हमेशा पाकिस्तान के शामिल होने का विरोध करता रहा है. पाकिस्तान ब्रिक्स में शामिल होने के लिए दशकों से बेताब है. वह इस मंच का हिस्सा बनकर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहता है, लेकिन उसकी यह मंशा अभी तक नहीं पूरी हो पाई.

इसकी स्थापना के समय सदस्य देशों ने एक मत से फैसला किया था कि बिना सभी सदस्यों की मंजूरी से किसी नए देश को इसमें नहीं शामिल किया जाएगा. ऐसे में भारत के लगातार विरोध के कारण पाकिस्तान अभी तक इसका सदस्य नहीं बन पाया है.  

क्यों है पाकिस्तान को ब्रिक्स की जरूरत?

पाकिस्तान के लिए ब्रिक्स की सदस्यता केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत भी है. वह लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, बढ़ते कर्ज, महंगाई और कमजोर आर्थिक विकास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक देश की GDP ग्रोथ रेट 3.70 प्रतिशत है.  ऐसे में वह ब्रिक्स को नए आर्थिक और वित्तीय विकल्पों के तौर पर देख रहा है.

रूस और चीन का समर्थन, फिर भी रास्ता मुश्किल

पाकिस्तान अपनी सदस्यता के लिए ब्रिक्स के प्रभावशाली देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान अपनी सदस्यता के लिए मौजूदा सदस्य देशों से संपर्क कर रहा है और रूस से भी समर्थन मांगा गया है.

चीन और रूस के साथ पाकिस्तान के मजबूत संबंधों के बावजूद उसकी सदस्यता का रास्ता आसान नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रिक्स का सर्वसम्मति आधारित निर्णय सिस्टम है. नए सदस्य या पार्टनर देश को शामिल करने के लिए मौजूदा सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है.

ऐसे में अगर किसी सदस्य देश को गंभीर आपत्ति है तो सदस्यता नहीं मिल सकती है. आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाना देने के कारण भारत हमेशा पाकिस्तान को शामिल करने का विरोध करता रहा है.  

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement