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हाल ही में तेलंगाना के मंचेरियल जिले में इस दूध की मांग बढ़ी है. यहां गधी का दूध बेचने का काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है. जानें आखिर क्या है वजह...
दक्षिण भारत के कई कस्बों में ऊंची कीमतों पर गधी के दूध की छोटी बोतलें बेचते लोगों को देखना कोई अनोखी बात नहीं है. हर बोतल की कीमत 100 रुपये होती है. कई दिन तो लोग इस व्यवसाय से 500 से 3000 रुपये तक कमा लेते हैं. हाल ही में तेलंगाना के मंचेरियल जिले में इस दूध की मांग बढ़ी है. यहां गधी का दूध बेचने का काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है.
गधी के दूध की मांग कोई नई बात नहीं है. दशकों से गांवों में लोग अपने बच्चों को थोड़ी मात्रा में गधी का दूध पिलाते रहे हैं. यह प्रथा सांस्कृतिक मान्यताओं और पारंपरिक चिकित्सा में निहित है. कई माता-पिता इसे प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे तब अपनाते हैं जब बच्चे खांसी, जुकाम या पाचन संबंधी समस्याओं से बीमार पड़ जाते हैं.
गधी के दूध पर इस भरोसे की वजह क्या है? आधुनिक अध्ययन इसके कुछ कारण बताते हैं. कहा जाता है कि इसका पोषण गुण गाय के दूध की तुलना में इंसानी दूध के ज्यादा करीब होता है. इसमें एलर्जी पैदा करने वाले प्रोटीन कम होते हैं जिससे कुछ बच्चों के लिए इसे पचाना आसान हो जाता है. इसमें विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में होता है. इतना ही नहीं इसमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं और इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. इन्हीं गुणों के कारण गधी के दूध को अक्सर गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी वाले बच्चों के लिए एक विकल्प के रूप में देखा जाता रहा है.
पोषण के अलावा इसकी प्रतिष्ठा पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से बढ़ी है. परिवार इसे न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बल्कि मौसमी संक्रमणों या सांस से जुड़ी दिक्कतों के प्राकृतिक उपचार के रूप में भी खरीदते हैं. कुछ लोग इसके सौंदर्य संबंधी लाभों का भी दावा करते हैं और कहते हैं कि प्राचीन काल से ही गधी के दूध का उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है और किंवदंतियां कहती हैं कि क्लियोपेट्रा चमकदार त्वचा के लिए इससे स्नान करती थीं.
हालांकि मेडिकल एक्सपर्ट्स इसमें सावधानी बरतने की सलाह देते रहते हैं. गधी के दूध में कुछ पोषक तत्व हो सकते हैं, लेकिन वे ज़ोर देकर कहते हैं कि यह मां के दूध की जगह नहीं ले सकता जो शिशुओं के लिए सबसे जरूरी आहार है. बाल रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता शिशुओं या छोटे बच्चों को गधे का दूध देने से पहले डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि इसके जरूरत से ज्यादा सेवन से जोखिम हो सकता है.
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