भारत
17 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है और जन्मदिन से पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ऐसा क्यों कहा- 'न रिटायर होउंगा न होने दूंगा'. इसके पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि इस 11 सितंबर में भागवत भी 75 साल के हो जाएंगे.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को संघ के शताब्दी वर्ष पर दिल्ली के विज्ञान भवन में चल रही व्याख्यानमाला के आखिरी दिन कहा कि- उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि वह रिटायर होंगे या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए. वह 80 की उम्र में भी शाखा लगाएंगे. हालांकि वह किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं. संघ उनसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, वह काम करने के लिए तैयार हैं.
आरएसएस प्रमुख का ये बयान खुदके और पीएम मोदी के जन्मदिन के कुछ दिन पहले ही आया है और इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद पीएम मोदी आगामी लोक सभी चुनाव में भी बीजेपी के अध्यक्ष के तौर पर ही लड़ेंगे. हालांकि नरेंद्र मोदी ने इस वाक्ये पर अभी चुप्पी साधी है और वह इन दिनों जापान की यात्रा पर है और उसके बाद चीन जाएंगे.
कयास थम गई
आरएसएस प्रमुख का बयान तब समाने आया है जब इस बात की देश के हर कोने में लोग चर्चा कर रहे हैं कि पीएम इस साल 17 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे और ये शायद उनका आखिरी कार्यकाल होगा. ऐसे में मोहन भागवत का ये बयान एक अलग ही नजरिए से देखा जाने लगा है. लोग इस बयान को पीएम मोदी के अगले कार्यकाल से जोड़कर देख रहे हैं. क्योंकि उन्होंने साफ कहा कि वह कभी किसी को नहीं बोले की किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए.
इसी मौके पर भागवत ने यह भी कहा थ कि भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है. हमारे भाजपा सरकार ही नहीं, सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं. हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं.
जब पूछा गया था ये सवाल
क्या राजनेताओं को 75 साल की उम्र के बाद अपना पद छोड़ देना चाहिए? इस सवाल का जवाब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिया है. मोहन भागवत ने कहा है, "मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे अपना पद छोड़ देना चाहिए या किसी और को मेरा पद छोड़ देना चाहिए. जिस दिन मुझे शाखा चलाने के लिए कहा जाएगा, मैं पद छोड़ दूँगा." इसके साथ ही भागवत ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया कि वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं या आरएसएस भाजपा में किसी और पर सेवानिवृत्त होने का दबाव बना रहा है.
मोहन भागवत ने कहा, "संघ में हमें काम दिया जाता है, चाहे हम चाहें या नहीं. अगर मैं 80 साल का हो जाऊं और मुझे शाखा चलाने को कहा जाए, तो मुझे जाना होगा. संघ जो कहता है, हम करते हैं. जो कहा जाएगा, वही होगा. मैं सरसंघचालक हूं, लेकिन क्या आपको लगता है कि सिर्फ़ मैं ही सरसंघचालक हो सकता हूं? यह किसी के संन्यास का मामला नहीं है."
सरसंघचालक ने भैयाजी दाणी का उदाहरण दिया
मोहन भागवत ने भैयाजी दाणी का उदाहरण दिया. "भैयाजी दाणी लंबे समय तक संघ के कार्यकर्ता रहे. यहाँ आने के बाद, उन्हें पूरा समय देना पड़ा. उनका घर सुचारू रूप से चल रहा था, वे यात्रा कर सकते थे. वे संघ को भी पूरा समय दे सकते थे. चूँकि हम पूरा समय देते हैं, इसलिए हम पर ज़्यादा काम आ जाता है, हम स्वयंसेवकों के कार्यकर्ता हैं," मोहन भागवत ने कहा.
भागवत महाकुंभ में क्यों नहीं गए?
मोहन भागवत से महाकुंभ में न जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हमें जहां कहा जाता है, हम वहां जाते हैं. उन्होंने महाकुंभ की तारीख़ बुक कर ली थी, लेकिन उनके लोग वहां थे. आरएसएस वहां था, लेकिन वह वहां नहीं थे. उन्हें बताया गया था कि वहां भीड़ होगी. कृष्ण गोपाल जी ने उनके लिए गंगाजल भेजा था. मौनी अमावस्या के दिन वह उस पानी से स्नान किए थे. आरएसएस ने उन्हें बताया और उनका मन उस काम से हटा दिया गया. अगर आरएसएस उन्हें नर्क में जाने को कहे, तो वह चले जाएंगे.
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