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Ghulam Nabi Azad ने क्यों किया DNA का जिक्र, क्या PM मोदी से करीबी में ही छिपा है आजाद का राजनीतिक भविष्य?

Ghulam Nabi Azad ने हाल ही में पार्टी छोड़ी थी. इस दौरान कांग्रेस ने आजाद पर बड़ा हमला बोला था और पीएम मोदी से करीबियों को लेकर सवाल भी खड़े किए थे.

Ghulam Nabi Azad ने क्यों किया DNA का जिक्र, क्या PM मोदी से करीबी में ही छिपा है आजाद का राजनीतिक भविष्य?
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डीएनए हिंदी: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से आकर देश की राजनीति में कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने पार्टी छोड़ी तो कश्मीर समेत जम्मू तक में कांग्रेस (Congress) की स्थिति कमजोर हो गई है. कांग्रेस आजाद के पार्टी छोड़ने का कारण उनकी पीएम मोदी (PM Modi) की नजदीकियों को बताकर उनके डीएनए तक पर सवाल खड़े किए थे. इसको लेकर अब आजाद ने आरोपों जवाब देते हुए कहा है कि विरोधी दलों के नेताओं से मुलाकात पर डीएनए नहीं बदल जाता है.  

दरअसल, पार्टी छोड़ने के साथ ही आजाद ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की नीतियों की आलोचना की थी. इसके बाद कांग्रेस की तरफ से कहा गया था कि आजाद का रिमोट कंट्रोल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है और उनका डीएनए ‘मोदी-मय’ हो गया है. इसको लेकर आजाद ने कहा, "22 राजनीतिक दलों के सांसदों ने (राज्यसभा से मेरी विदाई के समय) भाषण दिया था लेकिन सिर्फ उसी बात का उल्लेख किया गया जो प्रधानमंत्री ने की थी.’’ 

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DNA ऐसे नहीं बदलता 

आजाद ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, "अगर आप दूसरे राजनीतिक दलों के लोगों से मिलते हैं और उनसे बात करते हैं तो इससे आपका डीएनए नहीं बदल जाता है." राज्यसभा में आजाद के विदाई भाषण के दौरान पीएम मोदी ने आजाद की खूब तारीफ की थी. प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का हवाला देते हुए आजाद ने कहा, "यह पंरपरा है कि जब सदन के सदस्यों का कार्यकाल पूरा होता है तो सभी दलों के नेता इस मौके पर अपनी बात रखते हैं." उनका यह भी कहना था कि समय के साथ भारत की मिलीजुली संस्कृति बदल गई है.

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गंगाजमुनी तहजीब की कही बात

आजाद ने इस दौरान देश की गंगाजमुनी तहजीब का भी जिक्र किया है. उन्होंने कहा, "हिंदू और मुसलमान साथ रहते हैं. यह असामान्य बात नहीं है कि हिंदू अरबी और मुसलमान गीता का अध्ययन करते हैं. यही भारत की मिलीजुली संस्कृति रही है." इशारों में ही आजाद ने कांग्रेस के सेक्युलरिज्म पर भी तंज कसा है.

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आपको बता दें कि आजाद ने यह ऐलान कर रखा है कि वे जम्मू-कश्मीर में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे. इसके चलते ये भी माना जा रहा है कि जिस तरह पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी बनाकर बीजेपी से गठबंधन किया था, ठीक उसी तर्ज पर आजाद भी जम्मू-कश्मीर में एक नई पार्टी बना कर भाजपा से गठबंधन कर सकते हैं. 

जम्मू-कश्मीर का सियासी गणित

एक अहम बात यह है कि जम्मू-कश्मीर में चुनावी लिहाज से जम्मू तो बीजेपी (BJP) का गढ़ रहा है लेकिन कश्मीर में पार्टी को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है. ऐसे में पार्टी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जनता को लुभाने के लिए एक सर्वमान्य मुस्लिम नेता की तलाश कर रही थी.

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यदि आजाद बीजेपी के साथ गठबंधन करते हैं तो बीजेपी की मुस्लिम नेता की तलाश खत्म हो सकती है क्योंकि आजाद को राज्य की राजनीति का एक सर्वमान्य नेता माना जाता है. वहीं बीजेपी के इस रुख के चलते कांग्रेस में जिन गुलाम नबी आजाद का करियर हाशिए पर जा चुका था, पीएम मोदी से करीबी होने के चलते वे एक बार फिर मुख्य धारा की राजनीति में आ सकते हैं.

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