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Rajya Sabha Chunav: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो गया है. कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश बताया है. मीनाक्षी नटराजन ने कहा है कि हम इस फैसले को चुनौती देंगे. कांग्रेस ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई है.
Rajya Sabha elections: मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज हो गया है. मीनाक्षी नटराजन पर एक केस से जुड़ी जानकारी छुपाने का आरोप है. इस मामले के बाद सियासी तनाव बढ़ गया है और कांग्रेस ने इसे भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक सीट छीनने और दिनदहाड़े लूट का प्रयास बताया है. पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस तरह के प्रयास के खिलाफ कानूनी तरीके के अलावा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेगी.
मीनाक्षी नटराजन पर चुनावी हलफनामें में एक आपराधिक केस से जुड़ी जानकारी छुपाने का आरोप है. भाजपा ने नटराजन के नामांकन पत्र पर गंभीर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने तेलंगाना की अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी छिपाई है. दायर की गई आपत्ति के अनुसार, पूर्व कॉर्पोरेट अधिकारी ए. श्रीलता ने नटराजन के खिलाफ चौथे अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था. श्रीलता ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
यह मामला 2025 का है. श्रीलता के आरोपों के बाद मीनाक्षी नटराजन और अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए. ये केस अब भी कोर्ट में विचाराधीन है. लेकिन, इस बारे में मीनाक्षी नटराजन ने कोई जानकारी नहीं दी थी जो उन्हें भारी पड़ी.
हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि नटराजन के खिलाफ कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है, केवल अदालत का नोटिस प्राप्त हुआ है. कांग्रेस ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है. पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है. केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि जब भाजपा को एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका नामांकन खारिज करवा दिया.
मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन रद्द होने पर कहा, "जब सदस्य संख्या नहीं होते हुए भी भाजपा ने एक तीसरा प्रत्याशी उतारा, वहीं से हमें यह समझ में आने लगा कि किस तरह संविधान, लोकतंत्र को कुचलने की राजनीति हो रही है. SIR के जरिए अलग-अलग हथकंडे अपनाकर जो वोट चोरी की जा रही थी, अब राज्यसभा चुनाव और अन्य चुनावों को भी वैसा बनाने की कोशिश हो रही है. एक तरफ, ये महिलाओं की बात करते हैं दूसरी तरफ इन्होंने जिस तरह के हथकंडे अपनाए, पहले सदस्य संख्या न होने के बावजूद भी इन्होंने उम्मीदवार उतारा लेकिन जब उन्हें दिखा कि यहां एकता है तो उन्होंने एक लीगल नोटिस की आड़ में जिसे संज्ञान में भी लिया गया था, उसके आधार पर उन्होंने चुनौती दी. हमारे दोनों वकीलों ने सारे पक्ष रखे लेकिन उसे पूरी तरह सुना भी नहीं गया और फैसला आया. इससे स्पष्ट है कि उनकी नीति और नीयत क्या है. यह सिर्फ राज्यसभा की सीट की बात नहीं है. सवाल आज की स्थितियों पर है, सवाल यह है कि लोकतंत्र की जीत होगी या नहीं, भारत का संघीय ढांचा रहेगा या नहीं, यहां जो तानाशाही लाने की कोशिश की जा रही है उसके खिलाफ हमारी पूरी पार्टी लड़ेगी, हम इस फैसले को चुनौती देंगे."
बता दें कि भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी. इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन को मंगलवार, 9 जून की शाम 6 बजे तक अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया था. नटराजन के जवाब से संतुष्ट न होने पर उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई.
230 सदस्यों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं. बीजेपी ने तीन प्रत्याशी खड़े किए हैं. भाजपा के दो प्रत्याशी तो आसानी से चुनाव जीत जाएंगे लेकिन तीसरे प्रत्याशी को जीतने के लिए कांग्रेस खेमे के भी कुछ विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी.