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मायावती का आदेश मेरे लिए दुनिया में सबसे बड़ा.... क्या दामाद आकाश आनंद के लिए अशोक सिद्धार्थ ने लिया राजनीति से संन्यास?

बीएसपी से पूर्व राज्यसभा सांसद और मायावती के भतीजे आकाश आनंद से सुसर ने राजनीति से संन्यास क ऐलान किया है. उन्होंने संन्यास का ऐलान ऐसे समय में किया है, जब पार्टी में लगातार आकाश की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे थे.

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मायावती का आदेश मेरे लिए दुनिया में सबसे बड़ा.... क्या दामाद आकाश आनंद के लिए अशोक सिद्धार्थ ने लिया राजनीति से संन्यास?

मायावती, अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद (इमेज क्रेडिट - X)

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  • अशोक सिद्धार्थ ने राजनीतिक से संन्यास का ऐलान किया है 
  • वह मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं
  • अशोक पिछले 45 वर्षों से बीएससी से जुड़े थे
  • वह बीएससी से राज्यसभा सांसद भी रहे हैं. 

यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. बहुजन समाज पार्टी से पूर्व राज्यसभा सांसद और बीएससी अध्यक्ष मायावती के रिश्ते में समधी अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया है. उनका राजनीति छोड़ने का फैसला ऐसे समय में आया, जब उनके दामाद और मायावती के भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में भूमिका को लेकर लगातार सवाल उड़े रहे थे. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या अशोक सिद्धार्थ ने आकाश के लिए राजनीति से संन्यास लिया है और कुछ और कारण है?

बसपा सुप्रीमो ने रखी थी ये शर्त 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद तभी पार्टी में खुलकर काम कर सकेंगे और उनको कोई पद मिलेगा, जब उनके ससुर और BSP के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेंगे. मायावती की इस शर्त से साफ है कि आकाश आनंद की पार्टी में वापसी का रास्ता उनके ससुर के राजनीतिक भविष्य से होकर जाता है.

मायावती ने कल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और निजी हितों को छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेते हैं, तभी आकाश आनंद को पार्टी में खुलकर काम करने का मौका दिया जा सकता है.

बहन जी का आदेश मेरे लिए सर्वोपरी 

अशोक सिद्धार्थ ने एक्स पर पोस्ट कर 24 घंटे के अंदर ही राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि बहन मायावती का आदेश मेरे लिए दुनिया में सर्वोपरि है. आगे उन्होंने अपनो पोस्ट में लिखा कि मेरे संन्यास को आकाश की वापसी ने न जोड़ा जाएगा. मेरे दामाद से पहले वह आपको भतीजे हैं. वहीं उन्होंने मायावती का अपना राजनीतिक गुरू और बड़ी बहन बताया और अपने ऊपर लगे सभी आरोपो का बेबुनियाद बताया.

मायावती ने क्या लगाए थे अशोक पर आरोप?

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी और बहुजन आंदोलन के मिशन से ऊपर अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को रखा. पार्टी ने उन्हें अपने व्यवहार में सुधार करने के कई अवसर दिए, लेकिन उन्होंने इन मौकों का सही इस्तेमाल नहीं किया.

मायावती ने कहा कि अब भी अशोक सिद्धार्थ के पास मौका है कि वह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़ दें और निजी हितों से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें. उन्होंने इसे पार्टी, आंदोलन और परिवार के हित में उठाया जाने वाला कदम बताया.

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बार-बार बदली आकाश की भूमिका

आकाश आनंद, मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे हैं. उन्हें लंबे समय से मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय में पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर कई बार बदलाव देखने को मिले हैं.

आकाश को 2024 के बाद से BSP में कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं और फिर उनसे वापस भी ली गईं. वह पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं. हाल ही में मायावती ने उनकी नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियां वापस लेने का ऐलान किया था.

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कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अशोक सिद्धार्थ बीएसपी से पिछले 45 वर्षों से जुड़े हैं. वह पार्टी में कई अदम पदों पर रह चुके हैं. वह जनवरी 2009 से जनवरी 2015 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे और 5 जुलाई 2016 से जुलाई 2022 तक राज्यसभा सदस्य रहे. वह प्रयागराज, बस्ती और गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी भी रहें. 

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कैसे बढ़ी मायावती और अशोक के बीच दूरियां?

अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुई है. इसी से अंदाजा लगाता जा सकता है कि वह मायावती के कितने करीबी और भरोसेमंद थे, लेकिन अशोक की दूरी मायावती से इस कदर बढ़ गई कि उन्हें पार्टी से बाहर का भी रास्ता देखना पड़ा. 

फरवरी 2025 में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में BSP से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद अगस्त 2025 में माफी मांगने के बाद उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया था. 

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