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Justice UU Lalit: कौन हैं जस्टिस यूयू ललित? अगले महीने लेंगे भारत के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ

Who is Justice UU Lalit: जस्टिस यूयू ललित क्रिमिनल लॉ के स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने जून 1983 में वकालत की शुरुआत की थी. उन्हें साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया.

Justice UU Lalit: कौन हैं जस्टिस यूयू ललित? अगले महीने लेंगे भारत के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ

Who is Justice UU Lalit

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डीएनए हिंदी: भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने न्यायमूर्ति यूयू ललित के नाम की सिफारिश अपने उत्तराधिकारी के रूप में की है. जस्टिस यूयू ललित भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. CJI एनवी रमन्ना अगले महीने रिटायर हो रहे हैं. उनके रिटायरमेंट के बाद जस्टिस यूयू ललित CJI पद की शपथ लेंगे. जस्टिस ललित के अगला सीजेआई नियुक्त होने पर उनका कार्यकाल तीन महीने से भी कम का होगा, क्योंकि वह इस साल आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे.

जस्टिस उदय उमेश ललित ने जून 1983 में वकालत की शुरुआत की थी. उन्होंने साल 1983 से साल 1985 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की. यूयू ललित साल 1986 से साल 1992 तक पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के साथ भी काम कर चुके हैं. साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया.

जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) क्रिमिनल लॉ के स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सभी 2G मामलों में CBI के पब्लिक प्रोसिक्यूटर के रूप में ट्रायल्स में हिस्सा लिया. इसके अलावा उन्होंने दो कार्यकालों के लिए सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सदस्य के रूप में भी कार्य किया. उन्हें 13 अगस्त 2014 को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. इसके बाद उन्हें मई 2021 में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया.

कब-कब चर्चाओं में आए?
अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस ललित ने कई बार खुद को हाई-प्रोफाइल मामलों से अलग कर लिया. साल 2014 में उन्होंने याकूब मेनन की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. इस याचिका में 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में मेनन की मौत की सजा को बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी. साल 2015 में उन्होंने 2008 के मालेगांव विस्फोटों में निष्पक्ष सुनवाई की मांग करने वाली याचिका पर खुद को सुनवाई से अलग कर लिया क्योंकि उन्होंने पहले एक आरोपी का बचाव किया था. साल 2016 में उन्होंने आसाराम बापू के मुकदमे में अभियोजन पक्ष के एक प्रमुख गवाह के लापता होने की जांच की मांग करने वाली याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया.

पढ़ें- बच्चे सुबह 7 बजे स्कूल जा सकते हैं तो सुप्रीम कोर्ट में 9 बजे से कार्यवाही क्यों नहीं शुरू हो सकती: जस्टिस ललित

इनपुट- www.scobserver.in

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