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कौन थे त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़? पुलिस मुख्यालय में मिले मृत, सुसाइड की आशंका

Tripura DGP Anurag Dhankar Death News: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ सोमवार को अगरतला स्थित अपने कार्यालय में मृत पाए गए हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स में इस घटना को खुदकुशी बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

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कौन थे त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़? पुलिस मुख्यालय में मिले मृत, सुसाइड की आशंका

अनुराग धनखड़ (Image Source- X/@Tripura_Police)

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  • अनुराग धनखड़ त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के सीनियर आईपीएस अधिकारी थे
  • मई 2025 में उन्होंने त्रिपुरा के डीजीपी का पद संभाला था
  • अनुराग धनखड़ सोमवार को अगरतला स्थित अपने दफ्तर में मृत पाए गए
  • शुरुआती रिपोर्टों में उनके खुदकुशी करने का अंदेशा जताया जा रहा है

त्रिपुरा की पुलिस फोर्स से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है. राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ सोमवार (20 जुलाई 2026) को अगरतला में पुलिस मुख्यालय स्थित अपने दफ्तर में मृत पाए गए. नॉर्थईस्ट टुडे की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, अंदेशा जताया जा रहा है कि उन्होंने खुदकुशी की है. हालांकि, पुलिस महकमे या प्रशासन की तरफ से अभी तक मौत की असली वजहों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है.

कौन थे आईपीएस अनुराग धनखड़?

अनुराग धनखड़ त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के बेहद सीनियर और काबिल आईपीएस अधिकारी थे. पिछले साल ही यानी मई 2025 में उन्होंने त्रिपुरा के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) का पद संभाला था. डीजीपी की कमान मिलने से पहले वह राज्य में डीजीपी (इंटेलिजेंस) के तौर पर खुफिया विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

उन्होंने अपने पूरे करियर में करीब 16 साल त्रिपुरा में ही गुजारे थे, जिसके चलते उन्हें राज्य की कानून-व्यवस्था और वहां के जमीनी हालात की बहुत गहरी समझ थी. साल 2013 से 2016 के बीच वह त्रिपुरा में आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) के पद पर भी रह चुके थे.

नीरव मोदी केस की जांच और बड़े कारनामे

अनुराग धनखड़ को पुलिस महकमे में उनकी बेहतरीन जांच क्षमता के लिए जाना जाता था. जब देश का सबसे चर्चित पीएनबी घोटाला सामने आया था, तो 13 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी के केस की जांच का जिम्मा सीबीआई ने अनुराग धनखड़ को ही सौंपा था. उनके नेतृत्व में इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच आगे बढ़ी थी.

सेंट्रल डेपुटेशन के दौरान उन्होंने सीबीआई में एसपी, डीआईजी, जॉइंट डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर जैसे कई बड़े और रसूखदार पदों पर काम किया. इसके अलावा, वह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में आईजी (पर्सनल) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे.

अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाली

उनकी काबिलियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2003-2004 के दौरान वे कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का भी हिस्सा रहे थे. उन्होंने 2005 से 2013 और फिर 2016 से 2023 तक केंद्र सरकार के तहत ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट समेत कई सुरक्षा एजेंसियों में सेवाएं दीं.

यही नहीं, गृह मंत्रालय के अधीन 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए बनी विशेष जांच दल के चेयरमैन के रूप में भी उन्होंने बेहद अहम भूमिका निभाई थी. उनके अचानक चले जाने से पूरा पुलिस विभाग सदमे में है. 

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