भारत
लोकसभा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ, जिसका नाम उस महान व्यक्तित्व के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने भारत में एक क्रांति की नींव रखी थी. यह क्रांति न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने लाखों किसानों की जिंदगी भी बदल दी.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष केवल इसलिए इस बिल का विरोध कर रहा है क्योंकि यह किसी खास परिवार के नाम पर नहीं है. लेकिन असल सवाल यह उठता है कि त्रिभुवन दास पटेल कौन थे और उनका अमूल से क्या संबंध था? उनके द्वारा बोया गया बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिससे लाखों किसान आत्मनिर्भर बने हैं. अब उनके नाम पर स्थापित हो रही विश्वविद्यालय उनकी विरासत को और आगे ले जाने का कार्य करेगी.
त्रिभुवन दास केशुभाई पटेल भारत में सहकारिता आंदोलन के अग्रणी नेता थे. उन्होंने 1946 में खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की स्थापना की, जो बाद में ‘अमूल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ. यह वह दौर था जब गुजरात के किसान दूध व्यापारियों और बिचौलियों के शोषण का शिकार हो रहे थे. सरदार वल्लभभाई पटेल के मार्गदर्शन में त्रिभुवन दास ने किसानों को संगठित किया और सहकारी मॉडल की नींव रखी.
त्रिभुवन दास पटेल ने 14 दिसंबर 1946 को आणंद में खेड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की स्थापना की. यह वही संस्था है जो बाद में अमूल के रूप में जानी गई और भारत में श्वेत क्रांति की शुरुआत हुई. जब अमूल की स्थापना हुई थी, तब यह केवल 247 लीटर दूध से शुरू हुआ था, लेकिन आज यह भारत का सबसे बड़ा दुग्ध ब्रांड बन चुका है. 1970 के दशक तक त्रिभुवन दास पटेल इस संगठन के अध्यक्ष रहे और इसी दौरान उन्होंने डॉ. वर्गीज कुरियन को तकनीकी और विपणन क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी. वर्गीज कुरियन को डेयरी उत्पादन का अध्ययन करने के लिए डेनमार्क भेजा गया, जिससे अमूल को एक सशक्त आधार मिला. आज अमूल 36 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को जोड़ता है और इसका सालाना टर्नओवर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए कहा कि त्रिभुवन दास पटेल ने सहकारिता आंदोलन की नींव रखी थी और इस क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है. इसलिए, मोदी सरकार ने उनके सम्मान में आणंद में ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का निर्णय लिया है. शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा त्रिभुवन दास पटेल को दी गई बड़ी श्रद्धांजलि बताया.
अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि मोदी सरकार ने सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहले की सरकारों में सहकारी संस्थाओं के साथ टैक्स को लेकर अन्याय होता था, लेकिन अब प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (PACS) को विशेष महत्व दिया जा रहा है और उन पर लगने वाले टैक्स को कम किया गया है. त्रिभुवन दास केशुभाई पटेल का योगदान सिर्फ अमूल तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरे सहकारिता आंदोलन को मजबूत किया. उनके द्वारा बोया गया बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिससे लाखों किसान आत्मनिर्भर बने हैं.
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