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बिहार में इस साल के अंत तक चुनाव होने वाले हैं. सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं. इसी बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनाव स्ट्रैटिजिस्ट को पहचानने से ही इनकार कर दिया है.
बिहार में इस साल के अंत तक विधान सभा चुनाव होने हैं. चुनाव के मद्देनजर बिहार में गहमा- गहमी भी बढ़ गई है. पीएम जहां पिछले एक महीने में तीन बार बिहार का चक्कर लगा चुके हैं. वहीं पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनाव स्ट्रैटिजिस्ट को पहचानने से ही इनकार कर दिया है. उन्होंने पूछा कौन है प्रशांत किशोर? बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सांसद पप्पू यादव और प्रशांत किशोर में जुबानी जंग चल रही है. पिछले दिनों पप्पू यादव से जब बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर के पदार्पण पर जब इंडिया. कॉम ने सवाल पूछा तो पप्पू यादव ने पूछा कौन हैं प्रशांत किशोर?
पप्पू यादव ने उसके बाद प्रशांत किशोर के बॉडी लैंग्वेज से शुरुआत कर अपनी बात रखनी शुरू की. उन्होंने कहा कि "सिर से पैर तक अहंकार से भरा हुआ वह व्यक्ति है वह क्या राजनीति करेगा." कभी धर्म पिता तो कभी. वह आगे कहते हैं, "नीतीश कुमार को उन्होंने धर्म पिता कहा था. नीतीश कुमार ने भी इन्हें अपना वारिस माना और पार्टी की बागडोर नीतीश जी ने उनके हाथों में सौंप दी लेकिन आज अगर नजर डालें तो प्रशांत किशोर सबसे ज्यादा गालियां अपने पिता यानी नीतीश कुमार को ही दे रहे हैं."
बिहार से निर्दलीय 6 बार के सांसद पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही देखीए कि वह कांग्रेस पार्टी से अपनी पारी की शुरुआत करते हैं वहां उनका क्या हश्र होता है फिर वो कोलकाता पहुंचते हैं जहां से ममता बनर्जी उन्हें पार्टी से निकालती हैं फिर वह नीतीश कुमार को धोखा देते हैं. उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर पर विश्वास करने वाला धोखा खाएगा ही खाएगा.." "वह जिसके साथ जुड़े उसे ही आइना दिखा गए. वह सबसे पहले राहुल गांधी से जुड़े और उन्हें ही आईना दिखाया फिर बीजेपी ने उन्हें लात मार कर भगाया, फिर ममता बनर्जी ने उन्हें भगाया. अमरेंद्र सिंह को बढ़ाने पंजाब गए उनका नाश कर दिया. यूपी में फिर जुड़े और कांग्रेस के लिए खाट रैली की और वो ऐसी रैली थी की पूरे यूपी में कांग्रेस की खाट खड़ी हो गई. अरविंद केजरीवाल से लेकर गोवा तक गया लेकिन कहीं भी दाल नहीं गली."
सांसद ने आगे कहा कि वो (प्रशांत किशोर) बिहार को समझते ही नहीं है बिहार में जब पेट में बच्चा होता है तब ही वो राजनीति सीख लेता है. प्रशांत कॉर्पोरेट और ब्लैक की कमाई से राजनीति करने आए हैं लेकिन उनका घमंड से राजनीति होता है.प्रशांत किशोर को नहीं पता कि कर्पूरी ठाकुर की धरती है बिहार, जुब्बा साहिनी की धरती है. राम विलास, लालू यादव, शरद यादव, जॉर्ज फर्नाडिंस की धरती है.
बिहार चुनाव में किसकी होगी सरकार के जवाब में वो कहते हैं कि यदि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ईमानदारी से तैयारी करे तो कांग्रेस की सरकार बनने की चांसेज है. वह कहते हैं कि पिछले 15 साल से बिहार की जनता छटपटा रही है वह बदलाव चाहती है अगर कांग्रेस पार्टी ईमानदारी से कोशिश करे तो इस चुनाव में वह जीत सकते हैं.
पप्पू यादव ने कहा कि बिहार के युवा नया प्रयोग करना चाहते हैं. बिहार और बिहारियों के लिए किसी की कोई सोच नहीं है. प्रधानमंत्री साढ़े चार साल बाद बिहार आए हैं और झुनझुना पकड़ा रहे हैं. बिहार के लिए डोमेसाइल लागू होना चाहिए. हर क्षेत्र में किसी भी जाति की महिलाओं के लिए 70 फीसदी से अधिक आरक्षण दिया जाना चाहिए. बिहार को तुरंत जरूरत हेल्थ सिस्टम और शिक्षा के सुधार की. उन्होंने कहा, "अगर राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेंगे तो इंडिया गठबंधन सक्सेस करेगा." और यह पूछने पर कि बिहार में जात पात सबसे ज्यादा हावी रहा है. कास्ट सेंसस भी सबसे पहले बिहार में हुआ तो उन्होंने कहा, "पूरे देश में जाति हावी है. लिंगायत..नॉन लिंगायत..जाट- नॉन जाट बंगाली नॉन बंगाली, लेकिन बिहार बदनाम है." बिहार के पिछड़ेपन पर सांसद ने कहा कि हम उसपर काम नहीं कर रहे हैं. महागठबंधन में अपने रोल पर वह कहते हैं कुछ दिन और इंतजार कीजिए सबकुछ साफ हो जाएगा और तब हम बताएंगे कि हमारी पार्टी अलग से लड़ेगी की हम कांग्रेस के साथ लड़ेंगे.
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