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Delhi Satya Niketan Incident: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. छात्रों ने निगम पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और निगम कमिश्नर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि MCD कमिश्नर कौन हैं.
Delhi Satya Niketan Incident: दिल्ली में सत्य निकेतन की घटना के बाद एक बार फिर पुरानी इमारतों की सुरक्षा, नियमों के पालन और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई. हादसे में कम से कम सात छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं. हादसे के बाद MCD कमिश्नर संजीव खिरवार की भी चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं कि वह कौन हैं और उनके इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल दिल्ली नगर निगम की निगरानी भूमिका को लेकर उठ रहा है. सवाल यह है कि जिस इमारत का इस्तेमाल करीब 75 बेड वाले PG के तौर पर किया जा रहा था, उसकी सुरक्षा और स्ट्रक्चरल स्थिति की जांच समय-समय पर की गई थी या नहीं.
हादसे के बाद नगर प्रशासन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नगर प्रशासन पर विफलता का आरोप लगाया. संगठन ने MCD कमिश्नर संजीव खिरवार के इस्तीफे की मांग की है.
संजीव खिरवार 1994 बैच AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने इस साल जनवरी में MCD कमिश्नर नियुक्त किया गया था. इससे पहले 2022 में त्यागराज स्टेडियम से जुड़े विवाद के बाद उनका तबादला दिल्ली से बाहर कर दिया गया था. उस समय दिल्ली के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (रेवेन्यू) रहे खिरवार पर आरोप लगा था कि वह स्टेडियम में अपने कुत्ते को टहलाते थे.
इस वजह से एथलीटों और कोचों को निर्धारित समय से पहले स्टेडियम छोड़ना पड़ता था. खिरवार ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया था. इसके बाद उनका तबादला लद्दाख कर दिया गया था, जबकि उनकी पत्नी रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश भेजा गया था. अब सत्य निकेतन हादसे के बाद खिरवार की भूमिका को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है.
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए MCD के कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं.
सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच कराने का भी आदेश दिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि जांच में अगर किसी अधिकारी की लापरवाही या चूक सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित इस पांच मंजिला इमारत को पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. जानकारी के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था.
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कई घंटे तक अभियान चलाया गया. अब तक 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं.
इमारत चार दशक से भी ज्यादा पुरानी बताई जा रही है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इमारत के बेसमेंट में पानी जमा था. उन्होंने आशंका जताई कि पानी जमा होने और साथ चल रहे मरम्मत कार्य के कारण पुरानी इमारत की संरचना कमजोर हुई होगी. हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
इस घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित PG और किराये के आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. राजधानी में बड़ी संख्या में छात्र पुरानी या परिवर्तित आवासीय इमारतों में रहते हैं. ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि इन इमारतों की संरचनात्मक मजबूती और अग्नि एवं अन्य सुरक्षा मानकों की निगरानी किस तरह की जाती है.
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