भारत
Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र के कड़क और ईमानदार आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी बेबाक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं.
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों जबरदस्त चर्चा में हैं. हाल ही में पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में जैसे ही उन्होंने मंच पर कदम रखा, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. वहां मौजूद लोगों ने खड़े होकर उनका शानदार स्वागत किया. सोशल मीडिया पर "अनस्टॉपेबल तुकाराम" नाम से एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपने मोबाइल फोन से उनके इस स्वागत की झलकियां कैमरे में कैद करते नजर आ रहे हैं.
वर्ष 2005 बैच के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को प्रशासनिक हलकों में उनकी सख्त कार्यशैली और बिना किसी दबाव के नियम लागू करने के लिए जाना जाता है. अपने लगभग दो दशक के करियर में उनका लगभग 25 बार तबादला हो चुका है.
जहां एक तरफ बार-बार होने वाले इन तबादलों को राजनीति और दबाव से जोड़कर देखा जाता है, वहीं उनके समर्थक इसे उनके निडर स्वभाव और ईमानदारी का सबूत मानते हैं. वर्तमान में महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर के रूप में उनकी भूमिका ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है. सोशल मीडिया पर लोग उन्हें बॉलीवुड के चर्चित किरदार से जोड़कर "सिंघम" कह रहे हैं.
तुकाराम मुंढे के पद संभालने के बाद से ही राज्य भर के होटलों, पबों, रेस्तरां और खाद्य सामग्री बनाने वाली कंपनियों पर एफडीए की गाज गिर रही है. खाने में लापवाही और गंदगी की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई. जांच के दौरान एफडीए की टीमों को कई जगहों पर सड़ा हुआ मांस, एक्सपायर्ड सामान, बार-बार इस्तेमाल किया जाने वाला घटिया तेल, और रसोई में कॉकरोच व फंगस जैसी भयावह चीजें मिलीं.
इसके बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया और अब तक मुंबई समेत कई शहरों के लगभग 100 से ज्यादा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं. एफडीए ने मई से लेकर अब तक 1,100 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की है.
मुंढे की इस सख्त मुहिम से मुंबई के कई जाने-माने और पुराने ठिकाने भी नहीं बच सके. बांद्रा और दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध नूर मोहम्मदी होटल, शालीमार रेस्तरां, प्रसिद्ध के. रुस्तम आइसक्रीम, क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब और जुहू जिमखाना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी नियमों के उल्लंघन पर एफडीए की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.
हालांकि तुकाराम मुंढे का कहना है कि इस अभियान का मकसद किसी कारोबार को निशाना बनाना नहीं, बल्कि आम जनता की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. लेकिन उनकी इस कड़क कार्यशैली का होटल इंडस्ट्री का एक वर्ग विरोध भी कर रहा है. कुछ कारोबारियों ने छापेमारी के तरीकों पर सवाल उठाए हैं.
मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खाद्य सुरक्षा कानूनों का पालन निष्पक्ष और सही तरीके से कराया जाए. तमाम विवादों के बावजूद, पुणे में मिला जनसमर्थन यह साफ बताता है कि आम जनता के बीच उनके काम की भारी सराहना हो रही है.
ये भी पढ़ें- घर बैठे WhatsApp से बनवाएं आयुष्मान कार्ड! ऐसे पाएं 5 लाख रु का फ्री हेल्थ कवर