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कौन है बिट्टू तबाही? नदी सफाई से शुरू हुआ सफर, नीदरलैंड्स से आया नौकरी का ऑफर

मध्य प्रदेश के छात्र ने अकेले ही अजनार नदी की कायाकल्प कर दी. बिना तैरना जाने और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के, अपनी जमापूंजी से गंदी नदी से टनों कचरा निकाला.

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कौन है बिट्टू तबाही? नदी सफाई से शुरू हुआ सफर, नीदरलैंड्स से आया नौकरी का ऑफर

बिट्टू तबाही ने अकेले साफ की नदी (Image- @Bittu_Tabahi)

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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के एक 21 साल के लड़के ने अजनार नदी की सफाई का जो बीड़ा उठाया था, उसकी कहानी अब हर किसी के दिल को छू रही है. सोशल मीडिया पर बिट्टू तबाही के नाम से मशहूर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने जब गंदी और बदबूदार नदी को अकेले साफ करना शुरू किया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी यह मेहनत समंदर पार नीदरलैंड्स तक गूंजेगी.

सुरेंद्र के इस जज्बे को न सिर्फ अपने देश में सराहना मिली, बल्कि विदेश से एक बड़ी संस्था ने उन्हें अपने साथ काम करने का सीधा ऑफर दे दिया. नीदरलैंड्स की पर्यावरण संस्था 'द ओशियन क्लीनअप' के फाउंडर और सीईओ बोयन स्लैट ने जब एक्स पर सुरेंद्र की मेहनत की तस्वीरें और वीडियो देखे, तो वे हैरान रह गए. तस्वीरों में नदी का सफाई से पहले और बाद का रूप साफ नजर आ रहा था. 20-21 साल के इस भारतीय युवा के जुनून से प्रभावित होकर स्लैट ने सीधे कमेंट किया, "आओ, हमारे साथ काम करो."

कौन हैं बिट्टू तबाही?

बिट्टू तबाही मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले एक कॉलेज स्टूडेंट और वॉलिंटियर हैं. वे एक साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं और अभी पढ़ाई कर रहे हैं. ब्यावरा में अजनार नदी के किनारे बने एक स्थानीय मंदिर के पास प्लास्टिक का कचरा, काई, कीचड़ और उड़ती बदबू देखकर उनका दिल पसीज गया.

उन्होंने प्रशासन या किसी सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही सब ठीक करने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने 26 जनवरी 2026 का खास दिन चुना और सफाई अभियान की शुरुआत कर दी. 

 

अकेले दम पर झोंक दी अपनी जान

शुरुआत में सुरेंद्र के कुछ दोस्त उनके साथ जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरी तरह से उनका अकेला मिशन बन गया. सबसे हैरानी की बात यह है कि सुरेंद्र को तैरना तक नहीं आता था. उनके पास न तो कोई बड़ी गाड़ियां या मशीनें थीं और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम. वे सिर्फ हाथ के साधारण औजार लेकर नदी में उतर जाते थे. 

अपनी जमा पूंजी से खरीदा सफाई का सामान

उन्होंने अपने ही जेब खर्च और जमा पूंजी से सफाई का सामान खरीदा. घंटों पानी और कीचड़ में रहकर उन्होंने नदी से टन के हिसाब से प्लास्टिक और कचरा बाहर निकाला. यह काम जितना दिखने में प्रेरणादायक था, उतना ही जानलेवा भी था.

इस कठिन मेहनत का असर सुरेंद्र की सेहत पर भी पड़ा. गंदे पानी में लगातार रहने की वजह से उन्हें पैरों और हाथों में गंभीर इंफेक्शन हो गया, चमड़ी पर तेज खुजली की बीमारी झेलनी पड़ी और कई बार नदी में जहरीले सांपों से सामना भी हुआ. लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उनका हौसला डगमगाया नहीं.

जब मेहनत रंग लाई, स्थानीय हीरो से सीएम तक पहचान

सुरेंद्र अपने इस काम की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते थे, जिसके बाद उनका काम देश-विदेश में वायरल हो गया. रातों-रात वे अपने इलाके के हीरो बन गए। उनकी इस निष्काम सेवा की गूंज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक भी पहुंची. मुख्यमंत्री ने सुरेंद्र को अपने आवास पर बुलाया और शुक्रवार रात उनसे मुलाकात की.

सीएम मोहन यादव ने सुरेंद्र की जमकर तारीफ की, उनके जज्बे को सलाम किया और उन्हें सरकार की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा भी दिया. एक छोटे से शहर के आम लड़के का अपनी नदी को बचाने का यह छोटा सा प्रयास आज दुनिया भर के युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है. 

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