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अमेरिका से पढ़ाई, IIT बॉम्बे में प्रोफेसर... कौन हैं अर्जुन अरुणाचलम? जिन्होंने बनाई भारत की पहली MRI मशीन

Who is Arjun Arunachalam: अर्जुन अरुणाचलम की कंपनी ने भारत की पहली MRI स्कैनर मशीन बनाई है, जो विदेशी मशीन की तुलना में करीब 40 फीसदी सस्ती होगी. अभी तक भारत जापान, जर्मनी आदि देशों से MRI मशीनें खरीदता था. यह भारत की पहली स्वदेशी MRI मशीन है.

अमेरिका से पढ़ाई, IIT बॉम्बे में प्रोफेसर... कौन हैं अर्जुन अरुणाचलम? जिन्होंने बनाई भारत की पहली MRI मशीन

अर्जुन अरुणाचलम (इमेज क्रेडिट- X/AI)

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  • अर्जुन अरुणाचलम की कंपनी ने भारत की पहली MRI मशीन बनाई है
  • वोक्सेल ग्रिड्स कंपनी ने भारत की पहली स्वदेशी MRI मशीन बनाई है
  • इसकी कीमत विदेशी मशीन की कीमत से करीब 40 फीसदी सस्ती होगी
  • अभी तक भारत की अपनी स्वदेशी MRI मशीन नहीं थी  

Arjun Arunachalam Profile: भारत ने अपनी MRI मशीन बना ली है. अब देश में अमेरिका, जापान और जर्मनी से ये मशीनें नहीं आएंगी. भारत में बनने वाली ये मशीने विदेशों की तुलना में करीब 40 फीसदी तक सस्ती होंगी. इससे MRI की सुविधा आसानी से और सस्ते दामों में उपलब्ध होगी. इसे बेंगलुरु की एक कंपनी ने बनाया है, जो अर्जुन अरुणाचलम की कंपनी है और वह इसके CEO भी हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में. 

अर्जुन अरुणाचलम की कंपनी का नाम वोक्सेल ग्रिड्स (Voxel Grids) है. कंपनी मेडिकल रिसर्च और इनोवेश सेक्टर में काम करती है. अरुणाचलम ने देश की पहली MRI मशीन टाटा और जोहो के आर्थिक सहयोग से बनाई है. यह भारत की पहली स्वदेशी एमआरआई स्कैनर मशीन है. अभी तक देश में अमेरिका, जापान, चीन और जर्मनी आदि देशों से ये मशीनें आती थी. 

कौन हैं अर्जुन अरुणाचलम?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह विदेश चले गए. उन्होंने मैडिसन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में MS और PhD की डिग्री हासिल की है.

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने मार्च 2010 से अप्रैल 2015 तक IIT बॉम्बे में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी की. उन्होंने अमेरिका के जीआई हेल्थयेकर के रिसर्च सेंटर में भी काम किया है. वह एमआरआई फिजिक्स के एक्सपर्ट हैं. 

कहां से आया MRI मशीन बनाने का आईडिया?

अर्जुन MRI फिजिक्स के एक्सपर्ट हैं. ऐसे में उन्होंने MRI के कुछ साफ्टवेयर बनाने के लिए अपनी Voxel Grids नाम से कंपनी शुरू की. बाद में उन्होंने देखा कि MRI मशीन बनाने में कुछ ही कंपनियों का दबदबा है. ऐसे में उन्होंने MRI स्कैनर मशीन बनाने का फैसला किया.

आसान नहीं था सफर, विदेश कंपनियां करना चाहती थीं टेकओवर 

कुछ ही समय के बाद उनकी कंपनी फाइनेंशियल क्राइसिस से जूझने लगी. इसका मौका विदेशी कंपनियां उठाने को तैयार थी. उनके पास विदेशी आफर आने शुरू हो गए, लेकिन उन्होंने आफर को ठुकरा दिया. उनका मानना था कि अगर विदेशी कंपनियां पैसा देंगी तो वह कंपनी को टेकओवर करने की कोशिश करेंगी. 

टाटा और जोहो ने दिया पैसा, बन गई MRI मशीन

अरुणाचलम के इस प्रोजेक्ट में टाटा और जोहो ने पैसा लगाया और उनके आर्थिक मदद से अर्जुन भारत की पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन बनाने में कामयाब हो गए. भारत के इस एमआरआई मशीन का डिजाइन भी अन्य विदेशी मशीनों से बिल्कुल अलग है.  

4 इंजीनियरों से शुरू हुई थी कंपनी 

अरुणाचलम की कंपनी 4 इंजीनियरों के शुरू हुई थी, जिनकी संख्या आज करीब 33 हो गई है. भारत की अपनी एमआरआई मशीन विदेशों की तुलना में करीब 40 फीसदी सस्ती होगी, जिसका फायदा यह होगा कि आने वाले समय में MRI की फीस भी कम होगी और लोगों को कम पैसे में इसकी सुविधा मिलेगी. 

भारत में कितने मरीजों पर कितनी मशीनें हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो भारत में 1,000 लोगों पर सिर्फ 0.4 MRI स्कैनर उपलब्ध है. इनमें से अधिकतर मशीनें शहरी इलाकों में हैं, जिससे ग्रामीण आबादी में रहने वाले मरीजों को ये सुविधाएं नहीं मिल पाती. अर्जुन का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों तक इस पहुंच को आसान बनाना है. 

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