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BRICS 2026: दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट का आयोजन 12-13 सितंबर को किया जाएगा. पिछले साल इस समिट की मेजबानी ब्राजील ने की थी. ब्रिक्स के कुल 11 सदस्य देश हैं. इसकी जीडीपी G7 देशों के मुकाबले अधिक है. आइए जानते हैं कि पहली समिट कहां हुई थी और उस समय कितने सदस्य देश थे, कब कितने देश इससे जुड़ें.
भारत इस बार 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी रह रहा है. समिट का आयोजन दिल्ली के भारत मडंपम में 12-13 सितंबर 2026 को किया जाएगा. रूस के राष्ट्रपति राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं. वहीं चीन के चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी समिट में हिस्सा लेने के लिए 7 साल बाद भारत आएंगे. आइए जानते हैं कि पहली ब्रिक्स समिट का आयोजन कहां हुआ था औ उस समय कितने देश इसके सदस्य थे और दुनिया की जीडीपी में ब्रिक्स सदस्य देशों का कितनी योगदान है.
BRICS दुनिया 11 विकासशील देशों को एक संगठन है, जिसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. यह वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों, वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक शासन से जुड़े मामलों पर बातचीत और सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच के रूप में काम करता है. ब्रिक्स समिट का आयोजन हर साल किया जाता है. 17वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी पिछले साल ब्राजील ने की थी.
पहले ब्रिक्स का नाम ब्रिक था. इसकी पहली समिट का आयोजन जून 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में किया गया था. पहली बैठक में कुल 4 देश ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे. शुरुआत में ये चार देश की ब्रिक के सदस्य थे. बाद में इसका नाम ब्रिक से ब्रिक्स कर दिया गया.
2010 में न्यूयॉर्क में ब्रिक विदेश मंत्रियों की बैठक में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करके इसे ब्रिक्स नाम दिया गया. इसके बाद, दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में सान्या में तीसरे BRICS शिखर सम्मेलन में इसका सदस्य बना.
वहीं मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE जनवरी 2024 से BRICS के पूर्ण सदस्य बने और इंडोनेशिया जनवरी 2025 में सदस्य बना. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में पार्टनर देशों के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुए.
पहले के मुकाबले मौजूदा समय में BRICS की भूमिका बहुत ज्यादा बदल गई है. यह अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच बातचीत का मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, वित्त, विकास, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा का अहम केंद्र बन चुका है. सदस्य देश बढ़ने से साथ ही व्यापार और निवेश भी बढ़ने लगा और धीरे-धीरे इसकी अर्थव्यवस्था बढ़ती गई.
BRICS के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसकी इकोनॉमी से लगाया जा सकता है. IMF के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में परचेजिंग पावर पैरिटी यानी PPP के आधार पर वैश्विक GDP में BRICS देशों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी थी. इसके मुकाबले G7 देशों की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी रही. यानी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से BRICS अब G7 से आगे निकल चुका है.
चीन ब्रिक्स व्यापार नेटवर्क के केंद्र में है. UNCTAD की 2026 की एक स्टडी में पाया गया कि चीन BRICS के आपसी व्यापार में सबसे बड़ा निर्यातक और आयातक है, जबकि कई अन्य सदस्य निर्यात और आयात दोनों के लिए BRICS बाजारों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. सात सदस्य अन्य BRICS अर्थव्यवस्थाओं को निर्यात के लिए मुख्य रूप से प्राथमिक उत्पादों पर भी निर्भर हैं.
भारत का रोल संतुलित रहा है. भारत हमेशा ग्लोबल संस्थाओं में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की ज्यादा भागीदारी का समर्थन किया है, साथ ही पश्चिमी बाजारों, निवेश और टेक्नोलॉजी के साथ भी करीबी संबंध बनाए रखा है. यह बात जयपुर में भी साफ तौर पर दिखी.
ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक में भारत ने WTO-केंद्रित मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम, मजबूत और विविध ग्लोबल वैल्यू चेन, MSME के इंटरनेशनल लेवल पर विस्तार, ट्रेड फाइनेंस और डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाओं में ज्यादा सहयोग पर जोर दिया था.
इस बैठक में 'ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030' को भी आगे बढ़ाया गया, जिसमें व्यापार, निवेश, सेवाएं, डिजिटल अर्थव्यवस्था, इनोवेशन, फाइनेंशियल सहयोग और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे विषय शामिल हैं.
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