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Rajya Sabha सीट मिलने पर क्या करेंगे पूर्व CJI यूयू ललित? सरकारी नियुक्तियों पर भी रखा अपना पक्ष

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा की सीट का प्रस्ताव भेजा गया था जिसके बाद एक बड़ा बवाल हुआ था.

Rajya Sabha सीट मिलने पर क्या करेंगे पूर्व CJI यूयू ललित? सरकारी नियुक्तियों पर भी रखा अपना पक्ष
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डीएनए हिंदी: हाल में ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य जज के तौर पर यूयू ललित कार्यकाल खत्म हो गया और डी वाई चंद्रचूड़ नए सीजेआई नियुक्त हुए हैं. इस दौरान अब यूयू ललित ने अपने भविष्य को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने कहा है कि वे कई सरकारी नियुक्तियों और आयोगों में काम कर चुके हैं और यदि उन्हें ऐसी कोई पोस्ट ऑफर होती है तो उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा की सीट ऑफर की गई थी और यह एक बड़ा मुद्दा भी बना था. गोगोई ने ही राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला दिया था. ऐसे में विवाद बढ़ने पर गोगोई ने पद तो नहीं लिया था लेकिन इससे सुप्रीम कोर्ट के जजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई थी. इस मुद्दे पर पूर्व सीजेआई यूयू ललिता से भी सवाल पूछा गया जिसको लेकर उन्होंने कहा है कि वे ऐसा कोई राजनीतिक पद स्वीकार नहीं करेंगे.  

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नहीं लेंगे राज्यसभा का पद

दरअसल, राजनीतिक पदों से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर यूयू ललित ने कहा है कि वे राज्यसभा या गवर्नर पद को स्वीकार नहीं करेंगे. पूर्व सीजेआई ने कहा है कि भले ही यह डिमोशन नहीं हो लेकिन यह पूर्व चीफ जस्टिस के स्टेटस के हिसाब से उचित भी नहीं है. वहीं, उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम को बिल्कुल सही और संतुलित प्रक्रिया बताया है और इसकी आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया है. 

सीजेआई यूयू ललित ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा, "मेरे विचार से, देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद धारण करने के बाद, शायद, मुझे लगता है कि राज्यसभा के नामित सदस्य या किसी राज्य के राज्यपाल का पद सही विचार नहीं है.'' हालांकि जस्टिस ललित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख, लोकपाल और विधि आयोग के प्रमुख का जिक्र नौकरियों के रूप में किया और कहा कि अगर उनसे पूछा जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. ऐसे में यह माना जा रहा है कि वे ऐसे किसी पद को स्वीकार कर लेंगे. 

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कोलेजियम सिस्टम है सही

कोलेजियम सिस्टम को लेकर पूर्व सीजेआई ने कहा है कि ये (अपारदर्शी, जवाबदेह) उनके व्यक्तिगत विचार हैं... यह चीजों को करने का एक बिल्कुल सही और संतुलित तरीका है. जस्टिस ललित ने कहा कि जजों की नियुक्ति को कॉलेजियम सरकार समेत कई स्तरों की समीक्षा के बाद ही मंजूरी देता है। उन्होंने इन नियुक्तियों की गति के बारे में भी बताया, जो देश की विभिन्न अदालतों में मामलों के विशाल बैकलॉग को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर होने वाला विरोध बेबुनियाद है. 

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