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EOS-05 Satellite: इसरो ने सफलतापूर्वक EOS-05 सैटेलाइट लाॅन्च कर इतिहास रचा है. यह भारत का अपना पहला इमेजिंग सैटेलाइट है. इसे GSLV राॅकेट से इसरो ने लाॅन्च किया, इसे कभी इसरो का नाॅटी बाॅय कहा जाता था. आइए जानते हैं इस राॅकेट के बारे में
EOS-05 Satellite: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने आज सुबह तड़के 2:55 बजे अपना पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 लाॅन्च किया. यह भारत का अपना पहला इमेजिंग सैटेलाइट है. इस सैटेलाइट को इसरो ने GSLV- F17 राॅकेट से लाॅन्च किया. EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की फोटो लेने के लिए डिजाइन किया गया है. यह GSLV राॅकेट की 19वीं उड़ान थी. आइए जानते हैं कि GSLV राॅकेट की खासियत क्या है और इसे इसरो का नाॅटी बाॅय क्यों कहा जाता है.
GSLV राॅकेट का पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है. इस राॅकेट ने अपनी पहली उड़ान अप्रैल 2001 में भरी थी और इसके पहले मिशन का नाम GSLV-D1 था. इसरो ने इसे भारी सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट जैसी ऊंची कक्षाओं में भेजने के लिए बनाया था.
यह सैटेलाइट लाॅन्च करने वाला तीन फेज का रॉकेट है. इसका पहला फेज सॉलिड, दूसरा लिक्विड और तीसरा क्रायोजेनिक इंजन का होता है. इसमे स्वदेशी तकनीक से बने क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है.
GSLV की सबसे खासियत इसका क्रायोजेनिक इंजर है, जो इसका अपर स्टेज है, जिसमें बहुत कम तापमान पर रखे गए तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता है. क्रायोजेनिक इंजन भारी उपग्रहों को ऊंची ऑर्बिट में भेजने में अधिक उपयोगी होता है. इसरो ने इसी राॅकेट की मदद से EOS-05 को सफलतापूर्वक लाॅन्च किया है, जिस कारण इसकी चर्चा हो रही है.
GSLV को इसरो का नाॅटी बाॅय कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके कई मिशन फेल साबित हुए. 2010 में GSLV के दो मिशन असफल हुए थे. इसके क्रायोजेनिक अपर स्टेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे.
अगस्त 2021 को GSLV-F10 EOS-03 सैटेलाइट को लेकर रवाना हुआ था, लेकिन क्रायोजेनिक अपर स्टेज में तकनीकी समस्या के कारण मिशन सफल नहीं हो सका. GSLV-F10/EOS-03 मिशन भी असफल रहा.
जनवरी 2014 में इसरो ने GSLV-D5/GSAT-14 मिशन के साथ स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाया, जिसके बाद GSLV की क्षमता और विश्वसनीयता लगातार बेहतर हुई. 2023 में NVS-01, 2024 में INSAT-3DS और 2025 में NISAR मिशन को GSLV सीरिज के राॅकेट ने सफल बनाया था और आज इसी राॅकेट ने इतिहास रच दिया.
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