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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: कैसा आजाद भारत बनाना चाहते थे सुभाष चंद्र बोस, जताई थी कौन सी इच्छा

Parakram Diwas 2025: आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जायंती है. आइए इस अवसर पर हम आज जानते हैं कि आजादी के बाद वो कैसा भारत बनाना चाहते हैं, और उन्होंने अपने सहयोगियों से कौन सी इच्छाएं जताई थीं.

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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: कैसा आजाद भारत बनाना चाहते थे सुभाष चंद्र बोस, जताई थी कौन सी इच्छा

Subhash Chandra Bose

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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti 2025: आज देश के सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानियों के से एक और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यौम-ए-पैदाइश है. यानी की आज उनकी जायंती है. उन्होंने देश की आजादी के खातिर अपना सर्वस्त्र न्योछावर कर दिया था. वो भारत को आजाद मुल्क के तौर पर देखना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अपना सब कुर्बान कर दिया. 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो हुआ, लेकिन  तब नेताजी नहीं थे. 1945 में एक विमान हादसे के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. हालांकि उनके चाहने वाले कई लोग यही मानते रहे कि वो जिंदा हैं. एक समय के बाद वो वापस आएंगे. आइए हम आज जानते हैं कि आजादी दिलाने के बाद वो कैसा भारत बनाना चाहते हैं, और उन्होंने अपने सहयोगियों से कौन सी इच्छाएं जताई थीं.

नेताजी कैसा भारत देखना चाहते थे?
दरअसल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की चाहत थी कि आजादी मिलने के बाद वो बाकी के बड़े नेताओं के साथ मिलकर एक मजबूत भारत बनाएं. वो भारत को आजादी के बाद एक ताकतवर, सामनतावादी, आत्मनिर्भर, और स्वतंत्र देश के तौर पर देखना चाहते थे. वो एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे, जहां लोग अपनी क्षमता के हिसाब से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें. यही कारण है कि जानकार कहते हैं कि नेताजी की सोच और काम से प्रभावित होकर ही अपना देश एक विश्व महाशक्ति के तौर पर पाहचान हासिल कर सका है. नेताजी के अनुसार भारत की नीतियां एक आजाद देश के तचौर पर पूरी तरह से स्वतंत्र होना चाहिए. उनका मानना था कि देश के भातर राष्ट्रीयवाद से प्रेरित शिक्षा दी जाए, भारत के हर लोगों तक रोटी, कपड़ा, और शिक्षा पहुंचाई जाए, भारत अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करे.

नेताजी की इच्छाएं
सुभाष चंद्र बोस के ऊपर लिखी पुस्तक 'सुभाष की अज्ञात यात्रा' के मुताबिक भारत के आजाद हो जाने के बाद उन्होंने अपने लिए कुछ इच्छाएं जताई थीं. इसमें लिखा गया है कि नेताजी ने कई बार कहा था कि भारत के आजादी मिलने और चीजों को संगठित करने के बाद वो हिमालय का रुख कर लेंगे. वहां पर वो ध्यान-आध्यात्म की दुनिया में रम जाएंगे. यही उनकी जिंदगी का वास्तविक ध्येय है.' आपको बताते चलें कि नेताजी के जीवन में आध्यात्म की एक गहरी मौजूदगी थी. वो किशोरावस्था से ही उसको लेकर संजीदा थे. बचपन के दिनों से ही उनका आध्यात्म की तरफ झुकाव होने लगा था.

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