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पहलगाम हमले में हाफिज सईद पर पाकिस्तान में बैठे-बैठे ही चलेगा केस, जानिए क्या है इन एब्सेंटिया ट्रायल

Pahalgam Terror Attack Case Update: पहलगाम आतंकी हमले के मामले में भारतीय अदालत अब नए कानून के तहत आतंकी हाफिज सईद की अनुपस्थिति में ही यानी ट्रायल इन एब्सेंटिया के जरिए उस पर मुकदमा चलाएगी.

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पहलगाम हमले में हाफिज सईद पर पाकिस्तान में बैठे-बैठे ही चलेगा केस, जानिए क्या है इन एब्सेंटिया ट्रायल

पहलगाम आतंकी हमले के मामले में आतंकी हाफिज सईद पर चलेगा केस (फाइल फोटो)

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  • एनआईए ने हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड घोषित किया है
  • जम्मू की एक विशेष अदालत ने हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया
  • भारतीय अदालत नए कानूनी प्रावधान के तहत उसकी अनुपस्थिति में ही केस चलाएगी
  • अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के मामले में एक बहुत बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है. जम्मू की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और मुंबई हमलों (26/11) के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को इस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड घोषित किया है. पाकिस्तान सेना और सरकार के संरक्षण में खुलेआम घूम रहे इस आतंकी को भारत लाना फिलहाल मुमकिन नहीं हो पाया है, इसलिए अदालत अब उसकी गैर-मौजूदगी में ही उस पर मुकदमा चलाएगी. कानून की भाषा में इसे 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' कहा जाता है.

पहलगाम आतंकी हमला

पिछले साल अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में आतंकवादियों ने एक कायराना हमले को अंजाम दिया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें से अधिकांश बेकसूर आम नागरिक थे. साल 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में हुआ यह सबसे बड़ा और दर्दनाक हमला माना जाता है. एनआईए की जांच में यह साफ हुआ है कि इस हमले की पूरी प्लानिंग सीमा पार बैठे हाफिज सईद ने तैयार की थी और वह लगातार इस ऑपरेशन की निगरानी भी कर रहा था. 

क्या होता है 'ट्रायल इन एब्सेंटिया'?  

अक्सर देखा गया है कि भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड पाकिस्तान में छिपकर बैठ जाते हैं और भारतीय कानून की पहुंच से दूर रहते हैं. इसी से निपटने के लिए भारत सरकार ने देश के कानून में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा है. इस नियम के तहत, अगर कोई आरोपी गंभीर अपराधों में संलिप्त है, जानबूझकर देश से फरार है और बार-बार बुलाने पर भी अदालत में पेश नहीं होता, तो अदालत उसकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा शुरू कर सकती है.

एनआईए ने कोर्ट को बताया कि हाफिज सईद को भारत लाने के तमाम कूटनीतिक और कानूनी प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान उसे बचा रहा है. ऐसे में न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए इस नए कानून का सहारा लिया गया है.

जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?

  • दिसंबर 2025 की पहली चार्जशीट- एनआईए ने इस मामले में पहली चार्जशीट दिसंबर 2025 में पेश की थी. इसमें उन तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों के नाम थे जिन्होंने सीधे तौर पर इस हमले को अंजाम दिया था.
  • ऑपरेशन महादेव- सुरक्षाबलों ने 'ऑपरेशन महादेव' चलाकर इन तीनों आतंकियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था. संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया था कि मारा गया लश्कर कमांडर सुलेमान वापस पाकिस्तान भागने की कोशिश में था.
  • स्थानीय मददगारों पर कसता शिकंजा- नई चार्जशीट में पाकिस्तान के साजिद सैफुल्लाह जट्ट के साथ-साथ पहलगाम के ही दो स्थानीय निवासियों- बशीर अहमद और परवेज अहमद, के नाम भी जोड़े गए हैं. इन दोनों पर आतंकियों को पनाह देने और हमले के लिए रेकी करने का आरोप है.

इस ऐतिहासिक अदालती फैसले से यह साफ संदेश गया है कि सीमा पार बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी अब भारतीय न्याय प्रणाली से बच नहीं सकेंगे.

कौन है हाफिज सईद?

हाफिज सईद आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का संस्थापक और मुंबई में हुए 26/11 हमलों सहित भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मुख्य मास्टरमाइंड है. वैश्विक स्तर पर घोषित इस आतंकी पर अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है. वह फिलहाल पाकिस्तान की जेल में टेरर फंडिंग के मामलों में सजा काट रहा है. भारत सरकार ने पाकिस्तान से उसके प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की है ताकि उस पर भारतीय अदालतों में मुकदमा चलाया जा सके. हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि न होने से यह प्रक्रिया जटिल है, फिर भी भारत उसे सजा दिलाने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहा है.

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