भारत
NavIC प्रणाली भारत की मुख्य भूमि और उसकी सीमाओं से 1,500 किलोमीटर बाहर तक के क्षेत्र को सटीकता से कवर करती है. फिलहाल यह काम नहीं कर रही है. इसे फिर से शुरू करने के लिए NVS सीरीज सीरीज के उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे.
भारत सरकार इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम (NaVIC) को फिर से चालू करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है. इसके लिए निकट भविष्य में चार नए सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है. इस बात की जानकारी अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दिया है. केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि पिछले NVS-02 में आई खराबी को ठीक करने के बाद NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च के लिए तैयार है. इसके बाद NVS-04 और NVS-05 लॉन्च किए जाएंगे.
इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम को संक्षेप में NaVIC भी कहा जाता है. आसान भाषा में कहें तो ये भारत का अपना GPS है. NaVIC भारत का अपना स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने विकसित किया था. NaVIC के लिए पहली पीढ़ी के उपग्रह वर्ष 2013 से 2018 के बीच प्रक्षेपित किए गए थे. इन्हें भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के नाम से जाना जाता है.
इन उपग्रहों को लॉन्च करने के कुछ ही समय बाद इस समूह में समस्याएं आने लगीं और IRNSS सीरीज के कई उपग्रहों में लगी परमाणु घड़ियां बार-बार खराब होने लगीं. मार्च 2026 में IRNSS- F में लगी अंतिम एटॉमिक क्लॉक ने भी काम करना बंद कर दिया था. इससे भारत की उपग्रह आधारित प्रणाली नाविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) लगभग निष्क्रिय हो गई थी.
वर्तमान में केवल आईआरएनएसएस-1बी, आईआरएनएसएस-1एल और एनवीएस-01 ही सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं. नाविक प्रणाली के सुचारु संचालन के लिए कम से कम चार उपग्रहों में परमाणु घड़ियों का चालू हालत में होना आवश्यक है.
एनवीएस श्रृंखला नाविक के लिए दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों की श्रृंखला है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 2023 में एनवीएस-1 को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित किया था. लेकिन साल 2025 में एनवीएस-2 का प्रक्षेपण विफल रहा. इसके कारण एनवीएस-3, एनवीएस-4 और एनवीएस-5 के प्रक्षेपण में देरी हुई.
अब केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि एनवीएस-2 में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारणों का समाधान करने के लिए सभी आवश्यक सुधारात्मक उपाय शामिल करने के बाद एनवीएस-3 अब प्रक्षेपण के लिए तैयार है.
NavIC प्रणाली भारत की मुख्य भूमि और उसकी सीमाओं से 1,500 किलोमीटर बाहर तक के क्षेत्र को सटीकता से कवर करती है. यह भारतीय सेनाओं के लिए भी बेहद अहम है क्योंकि NavIC 5 से 10 मीटर से बेहतर सटीकता के साथ किसी स्थान की जानकारी प्रदान करता है. भारत के लिए NavIC सिस्टम का फिर से शुरू होना जरूरी है क्योंकि इससे किसी विदेशी नेविगेशन प्रणाली जैसे कि अमेरिका के GPS या रूस के GLONASS पर निर्भरता खत्म होगी.
बता दें कि जब 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत को GPS डेटा देने से इनकार कर दिया था तब ऐसे स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम की जरूरत महसूस हुई थी. इस सिस्टम से न केवल सैन्य क्षेत्र बल्कि चक्रवात, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्यों में भी सहायता मिलेगी. ये सिस्टम समुद्र में जाने वाले नाविकों और मछुआरों के लिए भी अहम है. इसकी मदद से मछली पकड़ने के क्षेत्रों और दूसरे देश की सीमा की स्पष्ट जानकारी मिलती है.