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15 साल की तन्वी को दिल की कौन सी बीमारी थी, जिसकी नहीं हो सकती थी सर्जरी... हो गई मौत? अब AIIMS कर रहा जांच

Tanvi Death Case: राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की इलाज के दौरान 1 सितंबर को एम्स में मौत हो गई. परिजनों ने एम्स पर सही समय से सर्जरी नहीं करने का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि सही समय पर अगर सर्जरी की गई होती तो उसकी मौत नहीं होती. डाॅक्टरों का कहना है सर्जरी संभव नहीं थी

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15 साल की तन्वी को दिल की कौन सी बीमारी थी, जिसकी नहीं हो सकती थी सर्जरी... हो गई मौत? अब AIIMS कर रहा जांच

 दिल्ली एम्स (इमेज क्रेडिट - X)
 

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  • 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली एम्स में 1 सितंबर को मौत हो गई थी 
  • परिजनों ने एम्स पर सर्जरी में देरी का आरोप लगाया है 
  • परिजनों का कहना है कि समय से सर्जरी नहीं की गई
  • पूरे मामले की जांंच के लिए एम्स ने कमेटी बनाई है. 

Tanvi Death Case: राजस्थान के कोइटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की 1 सितंबर को दिल्ली के एम्स में मौत हो गई. वह जन्म से ही गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही थी. परिजनों का आरोप है कि अगर समय से सर्जरी की गई होती है तन्वी की जान बच जाती है, जबकि एम्स का कहना है कि सर्जरी संभव नहीं थी. पूरे मामले की जांच के लिए अब एम्स ने कमेटी बनाई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि तन्वी को दिल की कौन सी बीमारी थी, डाॅक्टरों के अनुसार जिसकी सर्जरी नहीं की जा सकती थी. 

पहली बार कब AIIMS पहुंची थी तन्वी?

तन्वी के पिता मुकेश परियानी के अनुसार वह पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को इलाज के लिए दिल्ली AIIMS लेकर पहुंचे थे. इसके बाद कई वर्षों तक जांच और इलाज का सिलसिला चलता रहा.

उनका आरोप है कि सर्जरी को लेकर चर्चा हुई और तारीखें भी दी गईं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर  2015, 2016 या 2017 में उनकी बेटी का ऑपरेशन संभव था, तो उसे क्यों नहीं किया गया. वर्षों तक बेटी के टेस्ट होते रहे, लेकिन सर्जरी नहीं हुई.

क्या कहना है AIIMS का?

AIIMS के अनुसार, तन्वी की 2013 में CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन समेत कई जांचें की गई थीं. 31 जनवरी 2014 के एक अनुमान में उनकी बीमारी VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया बताई गई थी.

उस समय यूनिफोकलाइजेशन और कंड्यूट सर्जरी का प्रस्ताव भी दर्ज था. इलाज करने वाली टीम ने 2017 में तन्वी के हार्ट की जटिल एनाटॉमी को देखते हुए सुधारात्मक सर्जरी को संभव नहीं माना था और मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी थी.

जांच के लिए AIIMS ने बनाई कमेटी

तन्वी की मौत के बाद AIIMS ने 2 सितंबर को मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी गठित की. यह कमेटी पूरे घटनाक्रम, मेडिकल रिकॉर्ड, जांचों, दिए गए इलाज, विशेषज्ञों की राय और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा करेगी. संस्थान के मुताबिक, मामले में पोस्टमार्टम भी कराया जा रहा है.

तन्वी को कौन सी बीमारी थी?

मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट नाम की बीमार थी, जिसमें दिल के निचले दोनों हिस्सो के बीच की दीवार में छेद होता है. वहीं पल्मोनरी एट्रेसिया में दाएं वेंट्रिकल से फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाला सामान्य रास्ता बंद या ठीक से विकसित नहीं होता.

जब दोनों स्थितियां एक साथ हों तो हार्ट की संरचना काफी जटिल हो सकती है. ऐसे मामलों में फेफड़ों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है और मरीज को सायनोसिस जैसी समस्या हो सकती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ बच्चों में शुरुआत में दवाओं या अन्य मेडिकल प्रोसेस के जरिए फेफड़ों तक रक्त का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जाती है. बाद में बच्चे के हार्ट संरचना और फेफड़ों की धमनियों की स्थिति के आधार पर सुधारात्मक सर्जरी की योजना बनाई जाती है.

कुछ मामलों में MAPCAs नाम की अतिरिक्त रक्त वाहिकाएं विकसित हो सकती हैं। इन्हें एक साथ जोड़ने के लिए यूनिफोकलाइजेशन प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद कंड्यूट के जरिए हार्ट के दाहिने हिस्से को फेफड़ों से जोड़ा जा सकता है और VSD को बंद किया जा सकता है.

क्या देरी से सर्जरी हो सकती है मुश्किल?

मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार अगर ऐसे मरीज की सही समय पर इलाज नहीं हो पाता, तो तो उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की धमनियों और अतिरिक्त रक्त वाहिकाओं में बदलाव हो सकते हैं. इससे फेफड़ों का दबाव बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, हर मरीज की हार्ट संरचना अलग होने के कारण इलाज और उसके परिणाम भी अलग हो सकते हैं.

हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की भी हो रही थी जांच

AIIMS के अनुसार, तन्वी की हालत बिगड़ने के बाद उसे 24 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना के लिए भी जांच की जा रही थी.

1 सितंबर की तड़के करीब 2:50 बजे तन्वी को गंभीर सायनोसिस हुआ और उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन लगभग 48 प्रतिशत तक गिर गया. इसके बाद उसे हाइपोक्सिक स्पेल आया और कार्डियक अरेस्ट हो गया.

AIIMS के मुताबिक, मेडिकल टीम ने तुरंत इलाज और ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद तन्वी को बचाया नहीं जा सका. सुबह 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया.

अब जांच कमेटी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि तन्वी के इलाज के दौरान क्या-क्या मेडिकल फैसले लिए गए और उसकी मौत की परिस्थितियां क्या थीं.

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