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FIR के बाद बोले बृजभूषण सिंह, विनेश फोगाट की कृपा से नहीं मिला पद, इस्तीफा नहीं दूंगा

Brij Bhushan Singh on FIR: यौन उत्पीड़न के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए पहलवानों पर पलटवार किया है.

FIR के बाद बोले बृजभूषण सिंह, विनेश फोगाट की कृपा से नहीं मिला पद, इस्तीफा नहीं दूंगा

Brij Bhushan Singh

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डीएनए हिंदी: भारतीय कुश्ती महासंघ के चेयरमैन बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देने वाले हैं. एफआईआर दर्ज होने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आए बृजभूषण सिंह ने कहा है कि वह खुद को निर्दोष मानते हैं और इसके खिलाफ लड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफा कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन हर दिन एक नई मांग आती है. उन्होंने आरोप लगाने वाले पहलवानों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ये सारे पद विनेश फोगाट की कृपा से नहीं बल्कि जनता की कृपा से मिले हैं.

बृजभूषण सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, 'मैं निर्दोष हूं और किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हूं. मैं जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करूंगा. मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा है और मैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करता हूं. लगातार कई महीने से गाली पर गाली दी जा रही है, आरोप पर आरोप लगाए जा रहे हैं, हमें भी कष्ट होता है लेकिन हम चाहेंगे कि निष्पक्ष जांच हो और जल्द से जल्द जांच पूरी करके जो भी कार्रवाई बनती हो वह की जाए.'

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'अपराधी बनकर इस्तीफा नहीं दूंगा'
अपने खिलाफ आरोपों पर बृजभूषण सिंह ने कहा, 'आप देखेंगे तो पाएंगे कि इनकी डिमांड लगातार बदलती है. जनवरी में इन लोगों ने इस्तीफे की मांग की. उस वक्त मैंने कहा था कि अगर मैं इस्तीफा देता हूं तो इसका मतलब है कि मैंने इनके आरोपों को स्वीकार कर लिया. मेरा कार्यकाल लगभग खत्म हो चुका है. 45 दिनों में चुनाव होना है. इस्तीफा कोई बड़ी चीज नहीं है लेकिन मैं अपराधी बनकर इस्तीफा नहीं दूंगा, मैं अपराधी नहीं हूं.'

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बृजभूषण ने कहा, 'पहले इनकी मांग थी कि एफआईआर की जाए. वह हो गई. फिर इनकी मांग है कि जेल में डाला जाए, सारे पदों से इस्तीफा हो. मैं जो लोकसभा का सदस्य हूं यह पद मुझे विनेश फोगाट की कृपा से नहीं मिला है. यह मेरे क्षेत्र की जनता ने मुझे दे रखा है. कुश्ती संघ के अध्यक्ष का पद भी चुनाव लड़कर मिला है. एक ही परिवार और एक ही अखाड़ा क्यों धरने पर हैं. बाकी राज्यों के लोग क्यों नहीं?'

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