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पश्चिम बंगाल में राज्य की सत्ता संभालते ही नई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगा दी है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने जनता को कई सौगात देने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों, महिलाओं और आरक्षण व्यवस्था को लेकर कई बड़े कदम उठाए गए हैं. सरकार ने जहां एक तरफ राज्य के कर्मचारियों का बरसों पुराना सपना पूरा किया है, वहीं महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए तिजोरी खोल दी है.
पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी पिछले कई सालों से केंद्रीय दरों पर महंगाई भत्ते और सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए आंदोलन कर रहे थे. पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय यह मांग लगातार लटकी रही. सुवेंदु सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में इस मांग को पूरा करते हुए सातवें वेतन आयोग के गठन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. इस फैसले से राज्य के करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों की सैलरी में बंपर बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है.
चुनाव के दौरान भाजपा ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने का जो सबसे बड़ा वादा किया था, उसे सरकार बनते ही लागू कर दिया गया है. कैबिनेट ने राज्य में अन्नपूर्णा योजना के शुभारंभ को मंजूरी दे दी है. आने वाली 1 जून से राज्य की सभी पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे ट्रांसफर की जाएगी. यह योजना बंगाल के इतिहास में महिलाओं के लिए अब तक की सबसे बड़ी सीधी वित्तीय मदद वाली योजना साबित होने जा रही है.
महिलाओं को सहूलियत देने के इरादे से कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि 1 जून से पूरे पश्चिम बंगाल में सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा पूरी तरह से मुफ्त कर दी जाएगी. इस फैसले से नौकरीपेशा महिलाओं, कॉलेज जाने वाली छात्राओं और गरीब वर्ग की गृहणियों को रोजाना के सफर में भारी आर्थिक राहत मिलेगी.
नई सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब शासन और विकास केवल जरूरत के आधार पर होगा, न कि तुष्टीकरण की नीति पर. कैबिनेट ने कड़ा फैसला लेते हुए यह साफ कर दिया है कि राज्य में धार्मिक आधार पर बांटी जाने वाली तमाम सरकारी सहायता बंद की जाएगी. जून महीने से किसी भी ऐसे समूह या संस्था को सरकारी खजाने से वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी जिसका वर्गीकरण धार्मिक आधार पर हो.
आरक्षण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कैबिनेट ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को लागू करते हुए मौजूदा राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग सूची को रद्द कर दिया है. अब राज्य में ओबीसी आरक्षण की पात्रता की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच पैनल का गठन किया जाएगा. यह पैनल नए सिरे से पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगा, ताकि असली पिछड़े वर्गों को उनका पूरा हक मिल सके.